NRI निवेश से बैंक जमा में उछाल की उम्मीद, लेकिन कर्ज़ की रफ़्तार रहेगी ज़्यादा तेज़: SBI रिपोर्ट
भारतीय बैंकों में जमा होने वाली राशि की वृद्धि दर अगले कुछ सालों में तेज़ हो सकती है। एसबीआई रिसर्च की एक ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2027 तक बैंकों की जमा वृद्धि दर 15 प्रतिशत तक पहुँचने की…
भारतीय बैंकों में जमा होने वाली राशि की वृद्धि दर अगले कुछ सालों में तेज़ हो सकती है। एसबीआई रिसर्च की एक ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2027 तक बैंकों की जमा वृद्धि दर 15 प्रतिशत तक पहुँचने की संभावना है, जिसका मुख्य कारण प्रवासी भारतीयों (NRI) द्वारा भेजा जाने वाला पैसा होगा।
समाचार एजेंसी IANS द्वारा जारी इस रिपोर्ट के मुताबिक, विदेशी मुद्रा जमा (FCNR-B) के ज़रिए चालू वित्त वर्ष में अब तक लगभग 13 से 14 अरब डॉलर की बड़ी रकम जुटाई जा चुकी है। इससे देश के बैंकिंग सिस्टम का जमा आधार मज़बूत हुआ है। हालांकि, रिपोर्ट यह भी बताती है कि कर्ज़ की मांग जमा की तुलना में ज़्यादा तेज़ी से बढ़ रही है।
जमा और कर्ज़ की रफ़्तार में बढ़ता अंतर
आंकड़े इस तस्वीर को और साफ़ करते हैं। 30 जून को समाप्त हुए पखवाड़े में, बैंकों द्वारा दिए गए कर्ज़ में सालाना आधार पर 18.6% की भारी बढ़ोतरी हुई, जबकि इसी दौरान कुल जमा राशि में 13.3% की वृद्धि दर्ज की गई। इस तरह, दोनों के बीच का अंतर बढ़कर 5.3 प्रतिशत अंक हो गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह अंतर कोई अस्थायी समस्या नहीं, बल्कि कोविड-19 महामारी के बाद आए ढांचागत बदलावों का नतीजा है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि अब जमा जुटाने के तरीके बदल रहे हैं। बड़े महानगरों के पारंपरिक जमा बाज़ार लगभग संतृप्त (saturated) हो चुके हैं। अब जमा राशि में ज़्यादातर बढ़ोतरी अर्ध-शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों से हो रही है। इसकी वजह इन इलाकों में परिवारों की बढ़ती आय, महिलाओं पर केंद्रित कल्याणकारी योजनाएं और बैंकिंग सेवाओं का विस्तार है। वहीं, शहरी परिवार अपनी बचत का बड़ा हिस्सा अब म्यूचुअल फ़ंड और शेयर बाज़ार जैसे विकल्पों में लगा रहे हैं, जिससे बैंकों में उनकी जमा राशि का हिस्सा घट रहा है।
मज़बूत स्थिति में भारतीय बैंकिंग सेक्टर
कर्ज़ वितरण के मोर्चे पर भी बदलाव दिख रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि नियामकीय उपायों से असुरक्षित व्यक्तिगत ऋणों पर लगाम लगने के बाद, अब उद्योग, बुनियादी ढांचे, वर्किंग कैपिटल और गोल्ड लोन जैसे क्षेत्रों में कर्ज़ की मांग बढ़ी है।
एसबीआई रिसर्च का मानना है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और भू-राजनीतिक तनाव जैसे बाहरी झटकों का असर कर्ज़ की वृद्धि पर जमा की तुलना में अधिक होता है, जिससे सिस्टम में नकदी की कमी बनी रहती है। इसके बावजूद, रिपोर्ट में भारतीय बैंकिंग सेक्टर को 'गोल्डीलॉक्स' यानी एक संतुलित और अच्छी स्थिति में बताया गया है। बैंकों के पास पर्याप्त पूंजी है, उनकी कैपिटल एडिक्वेसी मज़बूत है और फँसे हुए कर्ज़ (NPA) भी कम हैं। आगे भी खपत की मांग और पूंजीगत खर्च के दम पर कर्ज़ की वृद्धि दर अच्छी बने रहने की उम्मीद है।
इनपुट: IANS



