जापान के रक्षा दस्तावेज़ पर उत्तर कोरिया का तीखा हमला, बताया 'सैन्य विस्तार का बहाना'
जापान द्वारा अपने नवीनतम रक्षा श्वेत पत्र (Defence White Paper) जारी करने के बाद उत्तर कोरिया ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। प्योंगयांग ने इस दस्तावेज़ को जापान के सैन्य विस्तार को सही ठहराने का एक…
जापान द्वारा अपने नवीनतम रक्षा श्वेत पत्र (Defence White Paper) जारी करने के बाद उत्तर कोरिया ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। प्योंगयांग ने इस दस्तावेज़ को जापान के सैन्य विस्तार को सही ठहराने का एक प्रयास बताते हुए इसकी कड़ी आलोचना की है। उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी केसीएनए के लिए एक लेख में अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा विश्लेषक कांग वॉन-चोल ने इसे जापान की "युद्ध मशीन के संचालन" के लिए कानूनी आधार तैयार करने वाला दस्तावेज़ करार दिया।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह लेख उत्तर कोरिया के सबसे ज़्यादा पढ़े जाने वाले अख़बार 'रोडोंग सिनमुन' में भी प्रकाशित हुआ। इसमें कहा गया है कि जापान ने अपने श्वेत पत्र में उत्तर कोरिया को बिना किसी आधार के 'गंभीर और तत्काल खतरा' बताकर अपने 'लापरवाह' सैन्य विस्तार को उचित ठहराने की कोशिश की है।
जापान की मंशा पर सवाल
कांग वॉन-चोल ने अपने लेख में आरोप लगाया कि जापान दोबारा सैन्य ताकत बढ़ाने की महत्वाकांक्षा के साथ तेज़ी से सैन्यीकरण की ओर बढ़ रहा है और यह श्वेत पत्र इसी समय जारी किया गया है। उन्होंने कहा, "जापान ने अपने पिछले अपराधों को नकारने और सैन्य शक्ति बनने की महत्वाकांक्षा को राष्ट्रीय नीति बना लिया है। साथ ही वह अमेरिका और उसके सहयोगियों के साथ गठबंधन को लगातार मजबूत कर रहा है।"
विश्लेषक ने जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी के उस बयान का भी उल्लेख किया जिसमें उन्होंने श्वेत पत्र जारी होने के बाद देश की सैन्य क्षमताओं को और मजबूत करने की बात कही थी। कांग ने इसे टोक्यो के सैन्यीकरण की दिशा में बढ़ने का एक और सबूत बताया और दावा किया, "यह साफ दिखाता है कि वह जापान को सैन्यीकरण के बेहद खतरनाक रास्ते पर कितनी तेजी से आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।"
उत्तर कोरिया का अपना पक्ष
जापान की आलोचना करने के साथ-साथ कांग ने उत्तर कोरिया के अपने सैन्य विस्तार का बचाव भी किया। उन्होंने कहा कि दूसरे देशों की कथित शत्रुतापूर्ण नीतियों को रोकने के लिए उसकी सैन्य क्षमता को मजबूत करना ज़रूरी है। उनका तर्क था, "जापान चाहे अपनी आक्रामक मंशा को कितनी भी बार 'रक्षा' का नाम दे, लेकिन वह क्षेत्र में शांति को खतरे में डालने और तनाव बढ़ाने वाली अपनी असली भूमिका नहीं छिपा सकता।"
उल्लेखनीय है कि जापान ने पिछले मंगलवार को सनाए तकाइची सरकार के तहत अपना पहला रक्षा श्वेत पत्र जारी किया था। इसमें ड्रोन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी आधुनिक तकनीकों को शामिल करके सैन्य आधुनिकीकरण पर जोर दिया गया है। वहीं, दक्षिण कोरिया के एकीकरण मंत्रालय ने इस पर सधी हुई प्रतिक्रिया दी है। एक अधिकारी ने कहा कि उत्तर कोरिया की यह प्रतिक्रिया कोई नई बात नहीं है और मंत्रालय इसे ज़्यादा महत्व नहीं देता।
इनपुट: IANS



