उत्तर कोरिया ने सामरिक बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण कर 'बड़ी सफलता' का दावा किया
उत्तर कोरिया ने अपने हथियार कार्यक्रम में एक और परीक्षण करते हुए एक ‘टैक्टिकल’ (सामरिक) बैलिस्टिक मिसाइल दागी है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, देश की सरकारी मीडिया ने 12 अक्टूबर को हुए इस…
उत्तर कोरिया ने अपने हथियार कार्यक्रम में एक और परीक्षण करते हुए एक ‘टैक्टिकल’ (सामरिक) बैलिस्टिक मिसाइल दागी है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, देश की सरकारी मीडिया ने 12 अक्टूबर को हुए इस परीक्षण को अपने हथियार प्रणालियों के एक महत्वपूर्ण तकनीकी हिस्से को उन्नत बनाने की दिशा में एक 'बड़ी सफलता' करार दिया है।
उत्तर कोरिया की आधिकारिक कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी (केसीएनए) ने दावा किया कि यह परीक्षण देश की सभी आक्रामक हथियार प्रणालियों की क्षमता और तकनीकी स्तर को बेहतर बनाने की दिशा में एक अहम बदलाव है। हालांकि, इस मिसाइल की तकनीकी क्षमताओं के बारे में कोई विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई। यह परीक्षण इस साल उत्तर कोरिया का 16वां बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च था।
दक्षिण कोरिया, जापान और अमेरिका की पुष्टि
इस घोषणा से एक दिन पहले ही दक्षिण कोरिया के ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ (जेसीएस) ने प्योंगयांग क्षेत्र से पूर्वी सागर की ओर कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागे जाने की पुष्टि की थी। जेसीएस के अनुसार, इनमें से एक मिसाइल ने 900 किलोमीटर से ज्यादा की दूरी तय की। जापान के रक्षा मंत्रालय ने भी दो मिसाइलें दागे जाने की बात कही थी, जिनमें से एक ने 910 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय की। इसी तरह, अमेरिकी पैसिफिक कमांड (पीएकॉम) ने भी दो बैलिस्टिक मिसाइलों के प्रक्षेपण की पुष्टि की।
मिसाइल की क्षमता पर विश्लेषण जारी
दक्षिण कोरिया और अमेरिका के अधिकारी अब इन मिसाइलों की तकनीकी विशेषताओं का विश्लेषण कर रहे हैं। जेसीएस के प्रवक्ता कैप्टन जांग डो-यंग ने कहा, "संभव है कि उत्तर कोरिया ने कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल को उसकी अधिकतम सीमा तक दागा हो। यह भी संभव है कि उसने मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल को कम दूरी तक परीक्षण के लिए लॉन्च किया हो।"
गौरतलब है कि कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों की मारक क्षमता 300 से 1,000 किलोमीटर होती है, जबकि मध्यम दूरी की मिसाइलें 1,000 से 3,000 किलोमीटर तक मार कर सकती हैं। जांग ने भरोसा दिलाया कि दक्षिण कोरिया और अमेरिका की संयुक्त रक्षा तैयारियां मजबूत हैं और वे ऐसी मिसाइलों का पता लगाने और उन्हें रोकने में पूरी तरह सक्षम हैं।
क्षेत्रीय तनाव और हथियारों की होड़
उत्तर कोरिया का यह कदम दक्षिण कोरिया द्वारा अपने स्वदेशी हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल (एचजीवी) के पहले सफल परीक्षण की घोषणा के ठीक चार दिन बाद आया है। हाइपरसोनिक मिसाइलों को उनकी अत्यधिक तेज गति (मैक 5 से अधिक) और अप्रत्याशित उड़ान पथ के कारण रोकना बेहद मुश्किल माना जाता है, इसलिए इन्हें अक्सर 'गेम चेंजर' कहा जाता है। विश्लेषकों का मानना है कि दक्षिण कोरिया ने यह घोषणा उत्तर कोरिया को अपनी सैन्य क्षमता का संदेश देने के लिए की थी।
इनपुट: IANS



