पलानी मंदिर भूमि अतिक्रमण और हिरासत में मौत: तमिलनाडु सरकार ने सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया
तमिलनाडु सरकार ने दो बड़े मामलों में किसी भी दोषी को न बख्शने का संकल्प लिया है। इनमें से एक मामला पलानी मंदिर की ज़मीन पर कथित अतिक्रमण का है और दूसरा नागरकोइल उप-जेल में एक विचाराधीन कैदी की हिरासत
तमिलनाडु सरकार ने दो बड़े मामलों में किसी भी दोषी को न बख्शने का संकल्प लिया है। इनमें से एक मामला पलानी मंदिर की ज़मीन पर कथित अतिक्रमण का है और दूसरा नागरकोइल उप-जेल में एक विचाराधीन कैदी की हिरासत में हुई मौत से जुड़ा है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, ऊर्जा और कानून मंत्री आर. निर्मलकुमार ने गुरुवार को राज्य मंत्रिमंडल की बैठक के बाद यह आश्वासन दिया।
पत्रकारों से बातचीत में मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने नागरकोइल में विचाराधीन कैदी सबरीवर्मन की मौत के मामले में अधिकारियों को तत्काल और उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का इस घटना में शामिल किसी भी व्यक्ति को बचाने का कोई इरादा नहीं है और दोषियों के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी।
मंदिर की संपत्ति और हिरासत में मौत पर सरकार का रुख
पलानी स्थित अरुलमिगु धनदायुथपानी स्वामी मंदिर की भूमि पर अतिक्रमण के आरोपों पर निर्मलकुमार ने कहा कि सरकार एक निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने उन दावों को खारिज कर दिया कि इस मामले के पीछे प्रभावशाली 'सत्ता केंद्र' हैं और कहा कि जांच बिना किसी हस्तक्षेप के आगे बढ़ेगी। मंत्री ने जोर देकर कहा, "कानून अपना काम करेगा, चाहे इसमें शामिल लोगों का रुतबा या प्रभाव कुछ भी हो।"
हिरासत में होने वाली मौतों पर सरकार की जवाबदेही तय करने की प्रतिबद्धता जताते हुए उन्होंने पिछली डीएमके सरकार पर आरोप लगाया कि उनके कार्यकाल में ऐसी कई घटनाएं हुईं लेकिन सच्चाई कभी पूरी तरह सामने नहीं आई।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप
बातचीत के दौरान मंत्री निर्मलकुमार ने राजनीतिक मुद्दों पर भी टिप्पणी की। उन्होंने आरोप लगाया कि डीएमके और एआईएडीएमके दोनों ही भाजपा के साथ गठबंधन करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि सत्तारूढ़ टीवीके सरकार को अस्थिर करने की कोशिशें हो रही हैं, जिसके तहत विधायकों को 50 करोड़ रुपए तक का प्रलोभन दिया जा रहा है। इसके अलावा, उन्होंने पूर्व डीएमके शासन के दौरान पंजीकरण विभाग में दस्तावेज़ पंजीकरण के लिए एक निश्चित प्रतिशत शुल्क वसूले जाने का भी आरोप लगाया।
इनपुट: IANS



