शुक्रवार, 4 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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ईरान के साथ बातचीत पर अमेरिका ने रखी शर्त, कहा - पहले व्यावसायिक जहाजों पर हमले रोकें

अमेरिका ने ईरान के साथ किसी भी तरह की बातचीत की संभावना को सिरे से खारिज कर दिया है, जब तक कि वह व्यावसायिक जहाजों पर हमले बंद नहीं करता। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस…

ईरान के साथ बातचीत पर अमेरिका ने रखी शर्त, कहा - पहले व्यावसायिक जहाजों पर हमले रोकें
(फोटो: IANS)

अमेरिका ने ईरान के साथ किसी भी तरह की बातचीत की संभावना को सिरे से खारिज कर दिया है, जब तक कि वह व्यावसायिक जहाजों पर हमले बंद नहीं करता। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने एक प्रेस ब्रीफिंग में साफ किया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का रुख इस मामले में बिल्कुल स्पष्ट है।

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व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए वेंस ने कहा, "राष्ट्रपति ने साफ कहा है कि हम उनसे बात नहीं कर रहे हैं और तब तक बात नहीं करेंगे, जब तक वे वाणिज्यिक जहाजों पर गोलीबारी बंद नहीं करते।" उन्होंने चेतावनी दी कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा और ईरान को उसके परमाणु कार्यक्रम को फिर से खड़ा करने से रोकने के लिए वॉशिंगटन सभी जरूरी कदम उठाने के लिए तैयार है।

रणनीति और दबाव के विकल्प

उपराष्ट्रपति ने ईरान पर दबाव बनाने के लिए अमेरिका की बहुआयामी रणनीति का खुलासा किया। उन्होंने कहा, "हर विकल्प खुला है। आर्थिक दबाव, सैन्य दबाव, कूटनीतिक दबाव और गुप्त दबाव, सभी विकल्प मेज पर हैं।" हालांकि, उन्होंने इस बात की पुष्टि करने से इनकार कर दिया कि क्या प्रशासन ईरानी असंतुष्ट समूहों को हथियार देने पर विचार कर रहा है, लेकिन यह संकेत दिया कि राष्ट्रपति ट्रंप के पास कई विकल्प मौजूद हैं।

होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिकी भूमिका

जेडी वेंस ने होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिकी अभियानों के लिए कोई समयसीमा तय करने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि यह ईरान के व्यवहार पर निर्भर करेगा और जब तक तेल ले जाने वाले जहाजों को खतरा है, तब तक समयसीमा बताना "गैर-जिम्मेदाराना" होगा। वेंस ने इस स्थिति को "जारी युद्ध" मानने की बात को खारिज करते हुए कहा कि बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई नहीं हो रही है।

उन्होंने अमेरिकी नौसेना की भूमिका पर जोर देते हुए कहा, "ईरान चाहता है कि होर्मुज स्ट्रेट से एक भी बैरल तेल बाहर न जाए। लेकिन कल रात 1.5 करोड़ बैरल तेल वहां से निकला। यह अमेरिका की वजह से संभव हुआ।" वेंस ने दावा किया कि अमेरिका की सुरक्षा के कारण ही दुनिया में ऊर्जा संकट नहीं आया है और कोई दूसरा देश यह भूमिका निभाने में सक्षम नहीं है।

अंतर्राष्ट्रीय सहयोग

वेंस ने बताया कि ईरान पर दबाव बनाने के इस अभियान में अमेरिका को कई देशों का साथ मिल रहा है। उन्होंने कहा कि तुर्किये, अजरबैजान, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और कतर मदद कर रहे हैं, भले ही कुछ देश सार्वजनिक रूप से इसे स्वीकार न करें। उन्होंने चीन के रवैये को भी सकारात्मक बताया। वेंस ने कहा, "मेरा मानना है कि चीन (पीआरसी) इस मामले में सहयोग करने को तैयार है। मैं यह नहीं कह रहा कि उन्होंने हमारी हर मांग मान ली है, लेकिन उन्होंने ईरान की तुलना में कहीं अधिक जिम्मेदाराना रवैया दिखाया है।"

इस दबाव अभियान के दो मुख्य लक्ष्य हैं: पहला, व्यावसायिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना, और दूसरा, ईरान को उसके परमाणु कार्यक्रम को दोबारा शुरू करने के लिए संसाधन जुटाने से रोकना।

इनपुट: IANS

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