शेयर बाज़ार में गिरावट: कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक चिंताओं ने निवेशकों को रखा सतर्क
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महंगाई की आशंकाओं और कच्चे तेल की कीमतों में आए तेज उछाल के कारण भारतीय शेयर बाजार बीते सप्ताह भारी दबाव में रहा। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम एशिया में…
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महंगाई की आशंकाओं और कच्चे तेल की कीमतों में आए तेज उछाल के कारण भारतीय शेयर बाजार बीते सप्ताह भारी दबाव में रहा। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और लाल सागर में नाकेबंदी के चलते कच्चे तेल का भाव 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जिसका सीधा असर निवेशकों की धारणा पर पड़ा।
पूरे कारोबारी सप्ताह के दौरान बीएसई सेंसेक्स में 2.68 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज की गई, जबकि एनएसई निफ्टी 2.33 प्रतिशत टूटा। सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन, शुक्रवार को सेंसेक्स 331 अंक (0.43%) गिरकर 76,059 पर और निफ्टी50 0.43% की गिरावट के साथ 23,767 पर बंद हुआ।
गिरावट के पीछे के प्रमुख कारण
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने महंगाई बढ़ने की चिंताएं बढ़ा दी हैं। इसके चलते अमेरिका और भारत, दोनों ही देशों में बॉन्ड यील्ड (सरकारी बॉन्ड पर मिलने वाला रिटर्न) में बढ़ोतरी हुई है। अब ऐसी संभावना भी मजबूत हो रही है कि सितंबर में ब्याज दरों में कटौती की जगह बढ़ोतरी की जा सकती है। इसके अलावा, अमेरिकी टैरिफ से जुड़ी अनिश्चितताओं ने भी बाजार का माहौल बिगाड़ा, जिसका सबसे ज्यादा असर निर्यात पर निर्भर रहने वाली कंपनियों पर दिखा।
सेक्टर और शेयरों का हाल
इस सप्ताह बिकवाली का सबसे ज्यादा दबाव बैंकिंग और रियल एस्टेट सेक्टर के शेयरों पर देखा गया। वहीं, एफएमसीजी और ऑटो सेक्टर ने अपने मजबूत तिमाही नतीजों के दम पर कुछ बेहतर प्रदर्शन किया। विशेषज्ञों ने बताया कि जुलाई के पीएमआई आंकड़ों से कारोबारी गतिविधियों में नरमी के संकेत मिले हैं, जिससे आर्थिक माहौल कमजोर हुआ है। इसका असर बाजार पर दिखा और सबसे ज्यादा बिकवाली बड़े शेयरों (लार्ज-कैप) में हुई, जिनका प्रदर्शन छोटे और मझोले शेयरों की तुलना में कमजोर रहा।
व्यापक बाजार की बात करें तो निफ्टी मिडकैप-100 में 1.90 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप-100 में 2.18 प्रतिशत की साप्ताहिक गिरावट दर्ज की गई।
बाजार की आगे की दिशा
विश्लेषकों का मानना है कि कंपनियों की कमाई में उल्लेखनीय सुधार वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी छमाही से ही देखने को मिल सकता है, बशर्ते कच्चे तेल की कीमतें स्थिर हों और पश्चिम एशिया में तनाव कम हो। तकनीकी नजरिए से, निफ्टी के लिए 23,700 से 23,600 का स्तर मजबूत सपोर्ट का काम करेगा, जबकि 23,800 से 24,000 के बीच इसे बाधा का सामना करना पड़ सकता है।
आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दर संबंधी फैसले, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक संकेतों पर टिकी रहेगी। इसके साथ ही भारत के जीडीपी और औद्योगिक उत्पादन (आईआईपी) के आंकड़े भी बाजार की चाल तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
इनपुट: IANS



