राजस्थान में मातृ मृत्यु पर मानवाधिकार आयोग सख्त, भीलवाड़ा-बांसवाड़ा में मौतों पर सरकार से मांगी रिपोर्ट
राजस्थान के भीलवाड़ा और बांसवाड़ा जिलों में प्रसव के बाद कई महिलाओं की मौत के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इन घटनाओं पर स्वतः संज्ञान लेते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने राज्य सरकार को नोटिस…
राजस्थान के भीलवाड़ा और बांसवाड़ा जिलों में प्रसव के बाद कई महिलाओं की मौत के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इन घटनाओं पर स्वतः संज्ञान लेते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, आयोग ने मुख्य सचिव से दो हफ्तों के भीतर इस गंभीर मामले पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
मीडिया में आई खबरों के आधार पर की गई इस कार्रवाई में NHRC ने कहा है कि अगर ये तथ्य सही हैं, तो यह सुरक्षित मातृत्व सेवाओं तक पहुंच से जुड़े मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है। आयोग ने भजनलाल शर्मा सरकार से पूछा है कि इन मौतों के पीछे क्या परिस्थितियां थीं, जांच की मौजूदा स्थिति क्या है और भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
कहां, कितनी मौतें हुईं?
रिपोर्ट्स के अनुसार, हाल के दिनों में बांसवाड़ा में छह प्रसूता महिलाओं और तीन नवजात शिशुओं की मौत हुई है। वहीं, भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल में सिर्फ छह दिनों (5 से 10 जुलाई) के भीतर सी-सेक्शन डिलीवरी के बाद पांच महिलाओं ने दम तोड़ दिया।
बांसवाड़ा में जिन महिलाओं की मौत की पुष्टि हुई है, उनमें रेखा (29), रेशमा (23), लक्ष्मी (21), लीला (32) और लक्ष्मी (32) शामिल हैं। भीलवाड़ा में जान गंवाने वाली महिलाओं की पहचान शिमला गुर्जर, फोरी देवी, ईशा पांडे, दिव्या और संगीता जिनागर के रूप में हुई है।
मौतों के पीछे संभावित कारण
प्रारंभिक जांच में कई मामलों में गंभीर एनीमिया (खून की कमी) को मातृ मृत्यु का एक संभावित कारण बताया जा रहा है। बांसवाड़ा में एक ताजा मामले में, 20 वर्षीय शिल्पा ने अस्पताल पहुंचने से पहले ही मृत शिशु को जन्म दिया था। अत्यधिक रक्तस्राव के कारण उसे उदयपुर रेफर किया गया, जहां 15 जुलाई को उसकी मौत हो गई।
इस बीच, भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल के एक ऑपरेशन थिएटर में संक्रमण पाए जाने की भी खबरें हैं, जिसके बाद जांच तेज कर दी गई है। हालांकि, अस्पताल के अधीक्षक डॉ. अरुण गौर ने चिकित्सा लापरवाही के आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि सभी मौतें प्रसव संबंधी गंभीर जटिलताओं के कारण हुईं।
इनपुट: IANS



