शुक्रवार, 24 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
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दवा कंपनियों की मार्केटिंग पर सरकार का नया शिकंजा, डॉक्टरों को दिए जाने वाले तोहफ़ों पर पूरी तरह रोक

केंद्र सरकार ने दवा कंपनियों द्वारा की जाने वाली मार्केटिंग को नैतिक और पारदर्शी बनाने के लिए एक नया और सख्त कानूनी ढांचा लागू कर दिया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस नए नियम का मकसद…

दवा कंपनियों की मार्केटिंग पर सरकार का नया शिकंजा, डॉक्टरों को दिए जाने वाले तोहफ़ों पर पूरी तरह रोक
(फोटो: IANS)

केंद्र सरकार ने दवा कंपनियों द्वारा की जाने वाली मार्केटिंग को नैतिक और पारदर्शी बनाने के लिए एक नया और सख्त कानूनी ढांचा लागू कर दिया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस नए नियम का मकसद डॉक्टरों को दिए जाने वाले महंगे तोहफ़ों, नकद लाभ और अन्य सुविधाओं पर रोक लगाकर दवाओं के प्रचार में अनैतिक तरीकों को खत्म करना है।

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शुक्रवार को संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, इस नए कोड को 'यूनिफॉर्म कोड फॉर फार्मास्युटिकल मार्केटिंग प्रैक्टिसेज (UCPMP), 2024' नाम दिया गया है। इसने 2015 के पुराने नियमों की जगह ली है। रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने लोकसभा में एक लिखित जवाब में बताया कि फार्मास्युटिकल्स विभाग ने यह कोड 12 अप्रैल, 2024 को अधिसूचित किया था, जिसमें सितंबर 2025 में कुछ संशोधन भी किए गए।

क्या हैं नए नियम और प्रावधान?

सरकार का लक्ष्य दवा कंपनियों और डॉक्टरों के बीच होने वाली गतिविधियों को रेगुलेट करना और दवाओं के जिम्मेदार प्रचार को बढ़ावा देना है। नए नियमों के तहत दवा कंपनियों पर कई नई जिम्मेदारियां डाली गई हैं:

  • आंतरिक निगरानी: हर कंपनी को एक 'एथिक्स कमेटी फॉर फार्मास्युटिकल मार्केटिंग प्रैक्टिसेज (ECPMP)' बनानी होगी और एक एथिक्स ऑफिसर नियुक्त करना होगा।
  • खर्च का खुलासा: कंपनियों को अपने मार्केटिंग खर्च का ब्योरा एक पोर्टल पर हर साल जमा करना अनिवार्य होगा। इसमें डॉक्टरों के लिए आयोजित कॉन्फ्रेंस और सेमिनार जैसे 'कंटीन्यूइंग मेडिकल एजुकेशन' (CME) कार्यक्रमों पर हुआ खर्च भी शामिल है।
  • पूर्ण जिम्मेदारी: कंपनियां अपने मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव्स और अन्य कर्मचारियों की सभी गतिविधियों के लिए पूरी तरह से जिम्मेदार होंगी।
  • शिकायत और अपील: शिकायतों के निपटारे के लिए दो-स्तरीय व्यवस्था बनाई गई है। अपील का निपटारा फार्मास्युटिकल्स विभाग द्वारा किया जाएगा।

डॉक्टरों को तोहफ़े देने पर सख्त पाबंदी

नए कोड में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि कोई भी दवा कंपनी किसी भी डॉक्टर या उनके परिवार के सदस्यों को तोहफ़े, नकद लाभ या किसी भी तरह की हॉस्पिटैलिटी जैसी सुविधाएं नहीं दे सकती है। इसके अलावा, कंपनियों को यह स्व-घोषणा पत्र भी देना होगा कि वे सभी नियमों का पालन कर रही हैं। नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए कंपनियों का स्वतंत्र, रैंडम या जोखिम-आधारित ऑडिट भी किया जा सकता है।

इनपुट: IANS

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