बुधवार, 2 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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नेपाल में बाढ़ से 1100 से ज़्यादा मौतें, प्रधानमंत्री ने जलवायु परिवर्तन पर दुनिया से मांगी मदद

नेपाल में पिछले हफ़्ते आई विनाशकारी बाढ़ से मरने वालों की संख्या 1100 के पार पहुँच गई है, जबकि लगभग 3,916 लोग अब भी लापता हैं। इस भीषण त्रासदी के बीच प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने जलवायु परिवर्तन के…

नेपाल में बाढ़ से 1100 से ज़्यादा मौतें, प्रधानमंत्री ने जलवायु परिवर्तन पर दुनिया से मांगी मदद
(फोटो: IANS)

नेपाल में पिछले हफ़्ते आई विनाशकारी बाढ़ से मरने वालों की संख्या 1100 के पार पहुँच गई है, जबकि लगभग 3,916 लोग अब भी लापता हैं। इस भीषण त्रासदी के बीच प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालयी क्षेत्र में बढ़ते खतरों पर चिंता जताते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से ठोस कार्रवाई की मांग की है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री ने नेपाली संसद के निचले सदन को संबोधित करते हुए कहा कि यह आपदा अब केवल एक पर्यावरणीय चिंता नहीं, बल्कि मानव जीवन और भविष्य के लिए एक गंभीर चुनौती बन चुकी है।

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बुधवार सुबह 9 बजे तक के सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, बाढ़ में बहे 1,114 शव बरामद किए जा चुके थे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह आपदा नेपाल-चीन सीमा के पास भोटेकोशी नदी की सहायक लेंगडे खोला में हिमस्खलन के कारण बनी एक अस्थायी झील के टूटने से हुई। इस प्राकृतिक बांध के टूटने से पानी, कीचड़ और मलबे का एक विशाल सैलाब निचले इलाकों की ओर बढ़ा, जिसने त्रिशूली नदी के रास्ते में आने वाली बस्तियों और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुँचाया।

आपदा कैसे हुई और आगे की तैयारी क्या?

प्रधानमंत्री शाह ने संसद में कहा, “इस बड़ी आपदा ने हमें चौबीसों घंटे नुकसान को नियंत्रित करने में जुटे रहने को मजबूर कर दिया है। साथ ही हमारे मन में एक गहरा सवाल भी उठा है कि आखिर यह आपदा हमारे सामने कैसे आई?” उन्होंने विशेषज्ञों के आकलन का हवाला देते हुए इस घटना को हिमालयी क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन से बढ़ते जोखिमों की एक गंभीर चेतावनी बताया। शाह ने ज़ोर देकर कहा कि नेपाल को इन खतरों के बारे में दुनिया को और मजबूती से बताना होगा, क्योंकि जलवायु परिवर्तन एक वैश्विक चुनौती है और इससे निपटना सभी की साझा ज़िम्मेदारी है।

बचाव कार्यों में देरी और अंतरराष्ट्रीय मदद पर सफाई

बाढ़ प्रभावितों तक समय पर चेतावनी न पहुँचने के सवालों पर प्रधानमंत्री ने बताया कि सूचना मिलते ही सुरक्षाकर्मियों को लोगों को सतर्क करने के लिए भेजा गया था, लेकिन वे खुद इस अभियान के दौरान लापता हो गए। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सहायता स्वीकार करने में सरकार की अनिच्छा संबंधी मीडिया रिपोर्ट्स को भी खारिज किया। शाह ने स्पष्ट किया कि आपदा के शुरुआती चरण से ही विभिन्न देशों के साथ समन्वय किया जा रहा था। उन्होंने विशेष रूप से भारत और चीन का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों पड़ोसी देशों ने पहले दिन से ही हवाई और तकनीकी जायजा लेने के लिए अपने विशेषज्ञ भेजे थे।

भारत-चीन समेत कई देशों ने की मदद

प्रधानमंत्री के अनुसार, प्रभावित इलाकों में भारी कीचड़ और मलबा जमा होने के कारण शुरुआती दौर में विदेशी बचाव दलों समेत किसी के लिए भी उतरना संभव नहीं था। उन्होंने कहा, “भारतीय और चीनी तकनीकी विशेषज्ञों ने नेपाली टीम और सेना के साथ मिलकर हालात का आकलन किया। जब परिस्थितियां कुछ अनुकूल हुईं, तभी प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचना संभव हो सका।” उन्होंने राहत और बचाव अभियान में सहयोग के लिए भारत, चीन, अमेरिका, ब्रिटेन, संयुक्त अरब अमीरात, पाकिस्तान और बांग्लादेश समेत कई देशों और एशियाई विकास बैंक (ADB), विश्व बैंक तथा संयुक्त राष्ट्र जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का आभार व्यक्त किया।

इनपुट: IANS

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