सोमवार, 10 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
राजनीति

FCRA संशोधन बिल 2026: नगालैंड और मिजोरम के मुख्यमंत्रियों ने की JPC जांच की मांग

केंद्र सरकार के प्रस्तावित 'विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026' पर पूर्वोत्तर के दो राज्यों ने चिंता जताई है। नगालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो और मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने…

FCRA संशोधन बिल 2026: नगालैंड और मिजोरम के मुख्यमंत्रियों ने की JPC जांच की मांग
(फोटो: IANS)

केंद्र सरकार के प्रस्तावित 'विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026' पर पूर्वोत्तर के दो राज्यों ने चिंता जताई है। नगालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो और मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से आग्रह किया है कि इस विधेयक को अंतिम रूप देने से पहले संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजा जाए ताकि इस पर व्यापक विचार-विमर्श हो सके।

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समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, दोनों मुख्यमंत्रियों ने कहा है कि विधेयक के प्रावधानों की गहन संसदीय जांच और संबंधित पक्षों के साथ विस्तृत चर्चा आवश्यक है। नगालैंड के सीएम नेफ्यू रियो ने अमित शाह को एक पत्र लिखकर यह मांग की, जिसमें उन्होंने पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के सरकारी प्रयासों का सम्मान करते हुए असली चैरिटेबल संस्थाओं पर पड़ने वाले संभावित नकारात्मक असर को लेकर आगाह किया।

चर्चों और सामाजिक संस्थाओं पर असर की चिंता

रियो ने अपने पत्र में नगालैंड के विशेष सामाजिक और ऐतिहासिक संदर्भ का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि राज्य में ईसाई आबादी बहुसंख्यक है और चर्चों ने शिक्षा, स्वास्थ्य, गरीबी उन्मूलन और सामाजिक कल्याण में ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके मुताबिक, इन गतिविधियों का एक बड़ा हिस्सा कानूनी विदेशी अंशदान से चलता है।

मुख्यमंत्री ने चिंता जताते हुए कहा, "प्रस्तावित संशोधन, अगर मौजूदा रूप में लागू किए जाते हैं, तो इन चुनौतियों को और बढ़ा सकते हैं और राज्य में चल रहे कई कल्याण, शिक्षा, हेल्थकेयर और सामाजिक सेवा प्रोग्राम पर बुरा असर डाल सकते हैं।" उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि नगालैंड के चर्चों का दुनिया भर के ईसाई समुदायों, खासकर अमेरिका के बैपटिस्ट समुदायों से 150 साल से भी पुराना ऐतिहासिक संबंध रहा है।

मिजोरम ने भी उठाई आवाज

इसी तरह की चिंता मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने भी व्यक्त की है। उन्होंने बताया कि हाल ही में उन्होंने नई दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। इस बैठक में मिजोरम की दो सबसे बड़ी चर्च संस्थाओं - मिजोरम कोहरान ह्रुआइट्यूट कमेटी (MKHC) और काउंसिल ऑफ चर्चेस इन मिजोरम (CCM) - के प्रतिनिधि भी शामिल थे।

लालदुहोमा के अनुसार, इन संगठनों ने प्रस्तावित कानून के कुछ प्रावधानों पर अपनी चिंताएं और सुझाव रखे और केंद्रीय गृह मंत्रालय को एक ज्ञापन भी सौंपा। गौरतलब है कि मिजोरम, नगालैंड और मेघालय में 60 लाख से ज़्यादा ईसाई रहते हैं और पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों में भी उनकी महत्वपूर्ण आबादी है।

इनपुट: IANS

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News4Social राजनीति डेस्क

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