दमोह मेडिकल कॉलेज पर उठे विवाद के बाद मध्य प्रदेश सरकार का बड़ा फैसला, PPP मॉडल पर नहीं चलेंगे सरकारी संस्थान
मध्य प्रदेश में सरकारी मेडिकल कॉलेजों के निजीकरण की अटकलों पर विराम लग गया है। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि सरकारी फंड से बने या बन रहे किसी भी मेडिकल कॉलेज को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP)…
मध्य प्रदेश में सरकारी मेडिकल कॉलेजों के निजीकरण की अटकलों पर विराम लग गया है। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि सरकारी फंड से बने या बन रहे किसी भी मेडिकल कॉलेज को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत निजी हाथों में नहीं सौंपा जाएगा। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, यह महत्वपूर्ण घोषणा उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने गुरुवार को की। यह फैसला दमोह के नवनिर्मित मेडिकल कॉलेज को लेकर उठे विवाद के बाद आया है, जहाँ इसे पीपीपी मॉडल पर चलाने का प्रस्ताव था।
उपमुख्यमंत्री शुक्ल, जिनके पास स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग का प्रभार भी है, ने सरकार का रुख साफ करते हुए कहा, "राज्य सरकार की ओर से बनाए गए या राज्य सरकार के पैसे से बनाए जा रहे मेडिकल कॉलेजों का संचालन और रखरखाव राज्य सरकार ही करेगी। इन मेडिकल कॉलेजों को पीपीपी मॉडल के तहत संचालन के लिए नहीं दिया जाएगा।"
दमोह कॉलेज को लेकर क्यों उठा था विवाद?
दरअसल, दमोह मेडिकल कॉलेज और अस्पताल को पीपीपी मॉडल के जरिए संचालित करने के एक कथित प्रस्ताव का सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के भीतर से ही कड़ा विरोध हो रहा था। दमोह से विधायक और भाजपा के वरिष्ठ नेता जयंत मलैया ने इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री मोहन यादव से मुलाकात कर अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी। उन्होंने मांग की थी कि संस्थान का संचालन सरकार खुद करे, न कि इसे किसी निजी संस्था को सौंपा जाए।
मलैया ने सरकारी निवेश पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब कॉलेज का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है और इस पर 350 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं, तो निजी भागीदारी की क्या आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि 30 एकड़ जमीन के अलावा, उपकरणों और फर्नीचर के लिए भी करीब 45-46 करोड़ रुपए के टेंडर फाइनल हो चुके हैं।
जनता के पैसे और महंगे इलाज पर चिंता
जयंत मलैया ने चिंता व्यक्त की थी कि सरकारी संसाधनों से बने संस्थान को निजी हाथों में देने से यह मुनाफे का केंद्र बन जाएगा। उन्होंने सवाल किया, "जनता के पैसे से बना कॉलेज निजी मुनाफे का केंद्र क्यों बने? दमोह की जनता महंगी फीस और महंगे इलाज का बोझ क्यों उठाए?" उन्होंने यह भी पूछा था कि यह फैसला आखिर किसके हित में है।
गौरतलब है कि दमोह मेडिकल कॉलेज की स्थापना क्षेत्र में चिकित्सा शिक्षा और विशेष स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के उद्देश्य से की गई है। सरकार का यह स्पष्टीकरण ऐसे समय में आया है जब राज्य के कई जिलों में नए मेडिकल कॉलेज खोले जा रहे हैं, ताकि स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच बढ़ाई जा सके।
इनपुट: IANS



