महाराष्ट्र में नकली पनीर पर एक साल की पाबंदी, मिलावट रोकने के लिए FDA का बड़ा फैसला
महाराष्ट्र में लोगों के स्वास्थ्य की सुरक्षा और खाद्य पदार्थों में मिलावट को रोकने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने सिंथेटिक या नकली (नॉन-डेयरी) पनीर पर…
महाराष्ट्र में लोगों के स्वास्थ्य की सुरक्षा और खाद्य पदार्थों में मिलावट को रोकने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने सिंथेटिक या नकली (नॉन-डेयरी) पनीर पर तत्काल प्रभाव से पूरे प्रदेश में एक साल का प्रतिबंध लगा दिया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह फैसला दूध से बने असली पनीर की आड़ में वनस्पति तेलों से बने उत्पाद बेचे जाने के बढ़ते मामलों के बाद लिया गया है।
FDA आयुक्त तुकाराम मुंढे के नेतृत्व में जारी इस आदेश के तहत, अब राज्य में कहीं भी नकली पनीर का निर्माण, भंडारण, वितरण, परिवहन या बिक्री नहीं की जा सकेगी। यह प्रतिबंध होटल, रेस्टोरेंट, कैटरिंग सेवाओं और अन्य सभी खाद्य प्रतिष्ठानों पर भी समान रूप से लागू होगा।
क्यों पड़ी प्रतिबंध की ज़रूरत?
यह कार्रवाई महाराष्ट्र विधानसभा में भाजपा विधायक विक्रम पचपुते द्वारा बार-बार सिंथेटिक पनीर के बढ़ते कारोबार का मुद्दा उठाए जाने के बाद हुई है। विधायक ने FDA के इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा, "यह कदम लोगों के स्वास्थ्य की सुरक्षा और खाद्य धोखाधड़ी पर रोक लगाने के लिए महत्वपूर्ण है।"
FDA की एक रिपोर्ट में भी चिंताजनक आंकड़े सामने आए थे। 1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 के बीच लिए गए पनीर और डेयरी एनालॉग के 308 नमूनों में से 109 (यानी 35.4 प्रतिशत) राज्य के मानकों पर खरे नहीं उतरे। इनमें से 79 सैंपल घटिया गुणवत्ता वाले थे, जबकि 30 को असुरक्षित घोषित किया गया था। जांच में पाया गया कि कई मामलों में दूध की वसा की जगह सस्ते वनस्पति तेल और गैर-डेयरी फैट का इस्तेमाल किया जा रहा था, जिससे उत्पाद की पोषण गुणवत्ता कम हो जाती है।
नए नियम और कार्रवाई
आदेश के मुताबिक, FDA की टीमें पूरे महाराष्ट्र में खाद्य कारोबारियों, आपूर्तिकर्ताओं और कैटरिंग कंपनियों पर औचक निरीक्षण करेंगी। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम (FSS Act), 2006 की धाराओं 50, 51, 52, 55 और 59 के तहत सख्त कार्रवाई होगी। इसमें भारी जुर्माना, उत्पाद की जब्ती और स्टॉक को नष्ट करना शामिल है।
इसके अलावा, दूध से असली पनीर बनाने वाले निर्माताओं को भी लेबलिंग और डिस्प्ले से जुड़े नियमों का सख्ती से पालन करना होगा। बिना बैच नंबर, बिल या उचित पैकेजिंग के खुले पनीर की बिक्री पर भी पाबंदी लगाई गई है, ताकि उत्पाद के स्रोत का पता लगाया जा सके।
इनपुट: IANS



