गुरूवार, 6 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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महाराष्ट्र: स्वास्थ्य योजनाओं में 15,000 से ज़्यादा संदिग्ध दावों की जांच के लिए SIT गठित

महाराष्ट्र में आयुष्मान भारत और महात्मा फुले जन आरोग्य योजना के तहत दर्ज हुए 15,000 से अधिक संदिग्ध चिकित्सा दावों की जांच के लिए राज्य सरकार ने एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। समाचार एजेंसी…

महाराष्ट्र: स्वास्थ्य योजनाओं में 15,000 से ज़्यादा संदिग्ध दावों की जांच के लिए SIT गठित
(फोटो: IANS)

महाराष्ट्र में आयुष्मान भारत और महात्मा फुले जन आरोग्य योजना के तहत दर्ज हुए 15,000 से अधिक संदिग्ध चिकित्सा दावों की जांच के लिए राज्य सरकार ने एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह फैसला मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में 10 जुलाई को हुई एक बैठक के बाद लिया गया, जिसके संबंध में बुधवार को एक सरकारी प्रस्ताव जारी किया गया।

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यह जांच उन 15,407 संदिग्ध चिकित्सा उपचार दावों पर केंद्रित होगी जो वर्ष 2024 से 2026 के बीच इन प्रमुख स्वास्थ्य योजनाओं के अंतर्गत दर्ज किए गए हैं। प्रारंभिक जांच में जब यह पाया गया कि कथित अनियमितताएं कई जिलों में फैली हुई हैं, तो सरकार ने एक स्वतंत्र एसआईटी के माध्यम से व्यापक जांच कराने का निर्णय लिया।

जांच का दायरा और SIT की संरचना

नाशिक मंडल के आयुक्त प्रवीण गेडाम की अध्यक्षता में गठित इस एसआईटी में सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग, सूचना प्रौद्योगिकी विभाग, साइबर पुलिस, आर्थिक अपराध शाखा और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। आवश्यकता पड़ने पर चिकित्सा शिक्षा विभाग के विशेषज्ञ डॉक्टर भी जांच में सहायता करेंगे।

एसआईटी कई महत्वपूर्ण पहलुओं की पड़ताल करेगी, जिसमें अस्पतालों द्वारा फर्जी या अनावश्यक उपचार के दावे, उपचार को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाना (अपकोडिंग), और अस्पतालों को पैनल में शामिल करने की प्रक्रिया में अनियमितताएं शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, संदिग्ध रोगी पंजीकरण, एक ही पहचान पत्र पर कई दावे और इसमें थर्ड पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर व जिला समन्वयकों की संभावित भूमिका की भी जांच की जाएगी।

30 दिनों में रिपोर्ट और भविष्य के लिए सुझाव

सरकारी आदेश के मुताबिक, एसआईटी को अपनी जांच पूरी करके 30 दिनों के भीतर राज्य सरकार को रिपोर्ट सौंपनी होगी। जांच दल को भविष्य में ऐसी गड़बड़ियों को रोकने के लिए मौजूदा दावा स्वीकृति प्रक्रिया, निगरानी प्रणाली और अस्पतालों के चयन की प्रक्रिया में सुधार के लिए सुझाव देने की भी जिम्मेदारी सौंपी गई है।

विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान राज्य के सार्वजनिक स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर ने स्पष्ट किया था कि इन योजनाओं के तहत 5 लाख रुपए तक का इलाज पूरी तरह निःशुल्क और कैशलेस है। उन्होंने चेतावनी दी थी कि यदि कोई अस्पताल लाभार्थियों से अतिरिक्त पैसे वसूलता पाया गया, तो उसे योजना से बाहर कर दिया जाएगा और उसके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई भी होगी।

इनपुट: IANS

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News4Social महाराष्ट्र डेस्क

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