महाराष्ट्र का 'ड्रग्स-मुक्त' अभियान: 2029 तक नशा खत्म करने के लिए सरकार ने बनाई व्यापक नीति
महाराष्ट्र सरकार ने राज्य को 2029 तक पूरी तरह नशा-मुक्त बनाने के लक्ष्य के साथ एक बड़ी पहल की है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में एक व्यापक नीति को मंजूरी दी गई…
महाराष्ट्र सरकार ने राज्य को 2029 तक पूरी तरह नशा-मुक्त बनाने के लक्ष्य के साथ एक बड़ी पहल की है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में एक व्यापक नीति को मंजूरी दी गई, जिसका उद्देश्य नशीले पदार्थों और सिंथेटिक ड्रग्स के नेटवर्क को जड़ से खत्म करना है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस कदम के साथ ही महाराष्ट्र, केंद्र सरकार के 'नशा मुक्त भारत अभियान' के तहत इतने बड़े पैमाने पर बहु-विभागीय अभियान शुरू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है।
इस नई नीति का आधार 'संपूर्ण सरकारी तंत्र' का दृष्टिकोण है, जिसमें ग्राम पंचायत से लेकर मंत्रालय स्तर तक सभी प्रशासनिक इकाइयां मिलकर काम करेंगी। आधिकारिक बयान के अनुसार, नीति के तहत अवैध ड्रग्स वाली फसलों की खेती, उत्पादन, परिवहन, बिक्री और सेवन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही एक बड़ा जन-जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा।
कई विभागों की संयुक्त जिम्मेदारी
अभियान के सफल कार्यान्वयन के लिए विभिन्न विभागों को स्पष्ट जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। तालमेल सुनिश्चित करने के लिए हर विभाग में एक उप सचिव रैंक का नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा जो 'एंटी-ड्रग टास्क फोर्स' (ANTF) के साथ सीधे समन्वय करेगा।
- कानून-प्रवर्तन और सप्लाई रोकना: गृह, परिवहन, बंदरगाह, और कानून व न्याय विभाग ड्रग नियंत्रण को प्रभावी ढंग से लागू करेंगे। वहीं, राजस्व, कृषि और वन विभाग ड्रग्स की सप्लाई रोकने पर काम करेंगे।
- जागरूकता और मांग में कमी: स्कूल शिक्षा, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा, खेल, ग्रामीण विकास, और सूचना एवं जनसंपर्क जैसे विभाग ड्रग्स की मांग कम करने के लिए अभियान चलाएंगे।
- नशा-मुक्ति और पुनर्वास: सामाजिक न्याय, जन स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा और शहरी विकास विभाग नशे की लत, इलाज और पुनर्वास की जिम्मेदारी संभालेंगे।
शिक्षा और प्रोत्साहन पर विशेष जोर
ड्रग्स के खतरे से युवाओं को बचाने के लिए शैक्षणिक संस्थानों में विशेष कार्यक्रम चलाए जाएंगे। अगले शैक्षणिक वर्ष (2027) से कक्षा 5 और उससे ऊपर के पाठ्यक्रम में नशीली दवाओं पर जागरूकता से जुड़ा एक पाठ शामिल किया जाएगा। साथ ही, सभी शिक्षण संस्थानों को अपने परिसर को 'ड्रग-मुक्त' बनाए रखना होगा। 'मुख्यमंत्री माझी शाला, सुंदर शाला' और 'माझा गांव, आरोग्य संपन्न गांव अभियान' जैसी योजनाओं में ड्रग-विरोधी जागरूकता के लिए अतिरिक्त अंक भी दिए जाएंगे। इसके अलावा, हर साल 26 जून को सर्वश्रेष्ठ 'ड्रग-मुक्त जिले' को पुरस्कृत भी किया जाएगा।
इनपुट: IANS



