‘लखपति दीदी’ योजना को मिला 'लोकओएस' का डिजिटल बूस्ट, करोड़ों ग्रामीण महिलाओं के जीवन में आ रहा बदलाव
केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी 'लखपति दीदी' योजना अब डिजिटल तकनीक के साथ तेजी से आगे बढ़ रही है। ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के इस अभियान को 'लोकओएस' (LokOS) नाम के एक डिजिटल प्ले
केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी 'लखपति दीदी' योजना अब डिजिटल तकनीक के साथ तेजी से आगे बढ़ रही है। ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के इस अभियान को 'लोकओएस' (LokOS) नाम के एक डिजिटल प्लेटफॉर्म से बड़ी ताकत मिली है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह प्लेटफॉर्म योजना के लाभार्थियों तक पहुंचने, उनकी प्रगति पर नजर रखने और पूरी प्रक्रिया की डिजिटल निगरानी में अहम भूमिका निभा रहा है।
यह प्लेटफॉर्म दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत विकसित किया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों जैसे सामुदायिक संगठनों के कामकाज को पूरी तरह से डिजिटल बनाना है। आसान भाषा में कहें तो यह एक ऐसा सिस्टम है जो ज़मीनी स्तर पर महिलाओं के आर्थिक रिकॉर्ड, लेन-देन और सरकारी योजनाओं से जुड़ाव का पूरा हिसाब-किताब रखता है।
डिजिटल नेटवर्क और रियल-टाइम निगरानी
सरकारी फैक्टशीट के अनुसार, 'लोकओएस' के माध्यम से अब तक एक विशाल नेटवर्क तैयार हो चुका है। इसमें 6,611 मास्टर ट्रेनर, 4.09 लाख कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन (CRP) और 3.87 करोड़ संभावित 'लखपति दीदी' शामिल हैं। प्लेटफॉर्म पर 18.50 करोड़ से ज़्यादा डिजिटल आजीविका रजिस्टर भी मौजूद हैं, जो महिलाओं को अपनी आय की योजना बनाने और उसे लागू करने में मदद करते हैं।
इसकी सबसे बड़ी खूबी रियल-टाइम मॉनिटरिंग और डिजिटल वित्तीय प्रबंधन है। इससे पारदर्शिता और कार्यकुशलता बढ़ी है। प्लेटफॉर्म के ज़रिए अब तक हज़ारों करोड़ की वित्तीय सहायता को ट्रैक किया जा रहा है, जिसमें 9,718.41 करोड़ रुपये का रिवॉल्विंग फंड (RF), 64,607.66 करोड़ रुपये का कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड (CIF) और 38.34 करोड़ रुपये का कम्युनिटी एंटरप्राइज फंड (CEF) शामिल है।
कैसे काम करता है 'लोकओएस'?
यह प्लेटफॉर्म वेब और मोबाइल ऐप, दोनों रूपों में उपलब्ध है। इसका वेब एप्लिकेशन प्रशासकों और अधिकारियों के लिए है, जो स्वयं सहायता समूहों (SHG) और उनके सदस्यों का प्रबंधन करते हैं। वहीं, मोबाइल ऐप फील्ड में काम करने वाले कार्यकर्ताओं को सामुदायिक संगठनों की गतिविधियों को आसानी से रिकॉर्ड करने की सुविधा देता है।
इस पर सदस्यों का पूरा रिकॉर्ड, उनकी प्रोफाइल, बचत, लोन, भुगतान, वित्तीय लेन-देन और विभिन्न सरकारी योजनाओं से जुड़ी जानकारी डिजिटल रूप में दर्ज होती है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 'लोकओएस' फिलहाल देश के 34 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों, 762 जिलों और 5.92 लाख गांवों तक अपनी पहुंच बना चुका है, जिससे ग्रामीण समुदायों के निर्माण में एक बड़ा डिजिटल बदलाव आया है।
इनपुट: IANS



