हल्द्वानी 'शुद्धिकरण' मामला: कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे के कार्यक्रम के बाद हुए विवाद में FIR दर्ज
उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के कार्यक्रम स्थल पर कथित 'शुद्धिकरण' किए जाने के विवाद में नैनीताल पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। समाचार एजेंसी…
उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के कार्यक्रम स्थल पर कथित 'शुद्धिकरण' किए जाने के विवाद में नैनीताल पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, यह कार्रवाई कई शिकायतों और कानूनी जांच के बाद की गई है, जिसकी मांग विभिन्न संगठन और राजनीतिक दल कर रहे थे।
यह मामला 8 अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में हुई एक घटना से जुड़ा है। आरोप है कि मल्लिकार्जुन खड़गे के कार्यक्रम के बाद कुछ लोगों ने उस जगह का 'शुद्धिकरण' किया था। इस घटना को लेकर पहले बेंगलुरु में एक 'जीरो एफआईआर' भी दर्ज कराई गई थी।
वरिष्ठ IPS अधिकारी करेंगे जांच
नैनीताल के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) मंजूनाथ टीसी ने मीडिया को बताया कि इस मामले को लेकर पूरे राज्य से कई शिकायतें मिल रही थीं, अकेले नैनीताल जिले में ही 19 से ज़्यादा आवेदन प्राप्त हुए। उन्होंने बताया कि सभी शिकायतों की कानूनी समीक्षा के बाद हल्द्वानी की निवासी अंजू की औपचारिक लिखित शिकायत के आधार पर कोतवाली में संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
एसएसपी ने यह भी जानकारी दी कि मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच का जिम्मा वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी जगदीश चंद्र को सौंपा गया है। उन्होंने कहा कि जांच जारी है और अगर किसी के पास घटना से जुड़ा कोई सबूत है, तो वह जांच अधिकारी से संपर्क कर सकता है।
शिकायतकर्ता ने 'जिहादी नारे' के दावों को नकारा
इस मामले में शिकायत दर्ज कराने वाली वकील अंजू ने सत्ताधारी भाजपा के उन दावों का खंडन किया है, जिनमें कहा गया था कि 'शुद्धिकरण' की रस्म 'जिहादी नारों' की प्रतिक्रिया में की गई थी। अंजू ने पत्रकारों से कहा, "मैं भी उस दिन मल्लिकार्जुन खड़गे का भाषण सुनने के लिए वहां मौजूद थी। ऐसा कुछ भी नहीं हुआ।"
उन्होंने आगे आरोप लगाया कि कुछ लोग अपने राजनीतिक लाभ के लिए सोशल मीडिया पर संपादित वीडियो और भ्रामक जानकारी फैला रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी किसी से कोई व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं है और उन्होंने एफआईआर में किसी का नाम नहीं लिया है। उनका दावा है कि बिना सच्चाई जाने भ्रामक वीडियो साझा करके सामाजिक सद्भाव को बिगाड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
इनपुट: IANS



