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NICE प्रोजेक्ट विवाद: जेडी(एस) ने राज्यपाल से की हस्तक्षेप की मांग, SIT जांच और जमीन वापसी पर जोर

बेंगलुरु-मैसूर इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर परियोजना (BMICP) में कथित अनियमितताओं को लेकर जनता दल (सेक्युलर) ने कर्नाटक सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, पार्टी के एक…

NICE प्रोजेक्ट विवाद: जेडी(एस) ने राज्यपाल से की हस्तक्षेप की मांग, SIT जांच और जमीन वापसी पर जोर
(फोटो: IANS)

बेंगलुरु-मैसूर इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर परियोजना (BMICP) में कथित अनियमितताओं को लेकर जनता दल (सेक्युलर) ने कर्नाटक सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को राज्यपाल थावरचंद गहलोत से मुलाकात कर इस मामले में तत्काल कार्रवाई की मांग की और एक विशेष जांच दल (SIT) से जांच कराने का आग्रह किया।

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जेडी(एस) विधायक दल के नेता सी.बी. सुरेश बाबू के नेतृत्व में इस प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल को पांच पन्नों का एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें NICE कंपनी द्वारा किए गए नियमों के उल्लंघन का विस्तृत ब्योरा दिया गया है। प्रतिनिधिमंडल में पार्टी विधायक और युवा इकाई के प्रदेश अध्यक्ष निखिल कुमारस्वामी भी शामिल थे। पार्टी ने सरकार को कार्रवाई के लिए दो सप्ताह का समय दिया है, और चेतावनी दी है कि यदि सरकार परियोजना का अधिग्रहण नहीं करती है, तो राज्यव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा।

जेडी(एस) की सात प्रमुख मांगें

पार्टी ने राज्यपाल के समक्ष सात सूत्रीय मांगें रखी हैं, जिनमें सबसे प्रमुख NICE द्वारा वसूले जा रहे अवैध टोल को तुरंत रोकना है। इसके अलावा, पार्टी ने निम्नलिखित मांगों पर जोर दिया:

  • NICE के कब्जे से 554 एकड़ अतिरिक्त जमीन वापस ली जाए।
  • परियोजना की SIT जांच और फोरेंसिक ऑडिट कराया जाए।
  • किसानों को उनकी जमीन का उचित मुआवजा दिया जाए।
  • परियोजना का सरकारी अधिग्रहण करने के लिए एक विशेष कानून बनाया जाए।
  • झीलों और तालाबों की भूमि को दोबारा सार्वजनिक स्वामित्व में लाया जाए।
  • कथित तौर पर शामिल अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई हो।

परियोजना पर गंभीर आरोप

जेडी(एस) ने आरोप लगाया है कि NICE कंपनी ने परियोजना से जुड़ी जमीन को निजी डेवलपर्स को बेच दिया। ज्ञापन में कहा गया है कि प्रस्तावित 111 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर में से पिछले 25 वर्षों में केवल पांच किलोमीटर सड़क ही बनी है, जबकि कंपनी ने 20,000 एकड़ से अधिक का लैंड बैंक बना लिया है। पार्टी का यह भी आरोप है कि लगभग दो दशकों से किसानों की जमीन बिना उचित मुआवजे के अधिग्रहित की गई है, जो संविधान के अनुच्छेद 300ए का उल्लंघन है।

हाई कोर्ट के फैसले का हवाला

राज्यपाल से मुलाकात के बाद निखिल कुमारस्वामी ने हाल ही में आए हाई कोर्ट के फैसले को 'ऐतिहासिक' बताया। उन्होंने कहा कि अदालत ने भूमि अधिग्रहण की अंतिम अधिसूचना को रद्द कर दिया है, क्योंकि परियोजना समझौते के अनुसार लागू नहीं की गई और किसानों को मुआवजा भी नहीं मिला। उन्होंने सवाल उठाया, "अदालत की टिप्पणियों के बावजूद करोड़ों रुपये का टोल क्यों वसूला जा रहा है?" निखिल कुमारस्वामी ने राज्यपाल से आग्रह किया कि वे सरकार को इस मामले में कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दें।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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