कर्नाटक का NICE कॉरिडोर विवाद: केंद्रीय मंत्री कुमारस्वामी ने अपनी ही राज्य सरकार पर बोला हमला, लगाए गंभीर आरोप
केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने कर्नाटक की बेंगलुरु-मैसूर इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर (NICE) परियोजना को राज्य के सबसे बड़े घोटालों में से एक बताते हुए कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने…
केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने कर्नाटक की बेंगलुरु-मैसूर इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर (NICE) परियोजना को राज्य के सबसे बड़े घोटालों में से एक बताते हुए कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने मांग की है कि सरकार को इस पूरी परियोजना का अधिग्रहण कर लेना चाहिए। रविवार को मेलुकोटे में श्री चेलुवनारायण स्वामी मंदिर में पूजा के बाद, समाचार एजेंसी IANS के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, कुमारस्वामी ने कहा कि वह किसी को भड़का नहीं रहे, बल्कि पूरे राज्य की जनता को इस कथित घोटाले के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए।
सरकार पर मिलीभगत के आरोप
भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री कुमारस्वामी ने आरोप लगाया कि NICE कंपनी नियमों के खिलाफ जाकर टोल वसूल रही है और मनमाने तरीके से दरें बढ़ा रही है। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान और पिछली सरकारों ने कंपनी के साथ मिलकर किसानों की जमीन लुटवाई है। उनके अनुसार, 20 साल बाद भी किसानों को उनका पूरा मुआवजा नहीं मिल पाया है, जबकि अधिग्रहित भूमि का इस्तेमाल रियल एस्टेट परियोजनाओं के लिए किया गया। हालांकि, कांग्रेस सरकार और कंपनी के अधिकारियों ने इन आरोपों का खंडन किया है।
समझौते और निजी हितों पर सवाल
कुमारस्वामी ने लोक निर्माण विभाग मंत्री के उस बयान पर भी सवाल उठाए, जिसमें कहा गया था कि NICE के साथ समझौते की अवधि अभी 20 साल बाकी है। केंद्रीय मंत्री ने पूछा, "सरकार किस समझौते की बात कर रही है? क्या वह कंपनी को अगले 20 साल तक कथित लूट की छूट देना चाहती है?" उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार एक निजी कंपनी के हितों की रक्षा कर रही है और मुख्यमंत्री समेत कुछ मंत्रियों के कंपनी के साथ व्यावसायिक संबंध हैं।
कुमारस्वामी ने स्पष्ट किया कि उनका निशाना परियोजना के प्रमोटर अशोक खेनी नहीं, बल्कि सीधे तौर पर राज्य सरकार है, क्योंकि अदालत का आदेश सरकार के खिलाफ है। टोल भुगतान के लिए लोगों को उकसाने के आरोपों को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि जनता को अब तक इन अनियमितताओं के खिलाफ खुद ही खड़ा हो जाना चाहिए था। उन्होंने याद दिलाया कि 2006-07 में भी उन्होंने विधानसभा में यह मुद्दा उठाया था, लेकिन तब उन्हें पर्याप्त समर्थन नहीं मिला।
इनपुट: IANS



