कर्नाटक: कैबिनेट विस्तार पर कांग्रेस नेताओं की बातचीत का वीडियो वायरल, पार्टी में असहजता बढ़ी
कर्नाटक में हाल ही में हुए कैबिनेट विस्तार को लेकर कांग्रेस के भीतर चल रहा असंतोष थमने का नाम नहीं ले रहा है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, अब दो वरिष्ठ नेताओं, पूर्व मंत्री एच.के. पाटिल और दिनेश…
कर्नाटक में हाल ही में हुए कैबिनेट विस्तार को लेकर कांग्रेस के भीतर चल रहा असंतोष थमने का नाम नहीं ले रहा है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, अब दो वरिष्ठ नेताओं, पूर्व मंत्री एच.के. पाटिल और दिनेश गुंडू राव की एक निजी बातचीत का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने से विवाद और गहरा गया है। यह वीडियो ऐसे समय में आया है जब पार्टी नेतृत्व पहले से ही मंत्रिमंडल में जगह न पाने वाले विधायकों को मनाने की कोशिश कर रहा है।
वायरल हुए वीडियो में दोनों नेता मंत्रियों के चयन के लिए अपनाए गए मानदंडों पर सवाल उठाते दिख रहे हैं। वीडियो में एक नेता को यह कहते हुए सुना जा सकता है, "चयन किस मानदंड पर किया गया? मुझे नहीं पता कि कौन से मानक अपनाए गए। मैंने पहली बार ऐसा कुछ देखा है। नए मानदंड अपनाए गए हैं और मैं चयन के आधार को समझ नहीं पा रहा हूं।" इस दौरान एच.के. पाटिल मुस्कुराते हुए नजर आ रहे हैं। यह बातचीत पाटिल के आवास पर हुई बताई जा रही है।
विवाद को कम करने की कोशिश
हालांकि, एच.के. पाटिल से मुलाकात के बाद पत्रकारों से बात करते हुए दिनेश गुंडू राव ने इस मुद्दे को तवज्जो न देने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि कैबिनेट विस्तार अब एक "बंद अध्याय" है और विधायक के तौर पर उनकी प्राथमिकता अपने निर्वाचन क्षेत्रों का विकास करना है। उन्होंने यह भी बताया कि वे पार्टी के वरिष्ठ नेता होने के नाते पाटिल से मिलने गए थे। गुंडू राव ने यह भी स्वीकार किया कि उन्होंने कैबिनेट विस्तार पर अपने विचार बी.के. हरिप्रसाद के सामने रखे हैं।
असंतोष के अन्य स्वर
पार्टी में असंतोष सिर्फ इन दो नेताओं तक ही सीमित नहीं है। बताया जा रहा है कि AHINDA (अल्पसंख्यक, पिछड़े वर्ग और दलित) समूह से जुड़े विधायक भी चयन प्रक्रिया से नाखुश हैं। इसी बीच, कांग्रेस के एक और वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री एच.सी. महादेवप्पा के गुरुवार को दिल्ली रवाना होने की खबर है, जहाँ उनके पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व से मिलने की संभावना है।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि कई नेता इस बात से नाराज हैं कि पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया द्वारा सुझाए गए कई करीबी सहयोगियों को अंतिम सूची में जगह नहीं मिली। इन विधायकों को लगता है कि सिद्धारमैया ने पार्टी आलाकमान के सामने उनकी दावेदारी को मजबूती से नहीं रखा। गौरतलब है कि सिद्धारमैया के करीबी माने जाने वाले महादेवप्पा पहले भी कई मुद्दों पर मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से अलग राय रख चुके हैं।
इनपुट: IANS



