अहमदाबाद में हाई-टेक जुआ अड्डा: कोडवर्ड, CCTV और छिपे हुए कैश के साथ 187 लोग गिरफ्तार
अहमदाबाद के मनपसंद जिमखाना में चल रहे एक बड़े जुआ रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है, जहाँ गुजरात पुलिस की राज्य निगरानी प्रकोष्ठ (SMC) ने छापा मारकर 187 लोगों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई हाल के वर्षों…
अहमदाबाद के मनपसंद जिमखाना में चल रहे एक बड़े जुआ रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है, जहाँ गुजरात पुलिस की राज्य निगरानी प्रकोष्ठ (SMC) ने छापा मारकर 187 लोगों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई हाल के वर्षों में राज्य की सबसे बड़ी जुआ-विरोधी कार्रवाइयों में से एक मानी जा रही है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, यह अड्डा एक बेहद सुनियोजित प्रणाली पर चल रहा था, जिसमें सीधे नकदी के इस्तेमाल से बचने के लिए कोडवर्ड वाली पर्चियों का इस्तेमाल किया जाता था।
यह पहली बार नहीं है जब इस परिसर पर कार्रवाई हुई है। दरियापुर स्थित इस जिमखाना पर पिछले पांच सालों में यह तीसरी बड़ी पुलिस छापेमारी है। इससे पहले 2021 में SMC ने ही यहाँ छापा मारकर 183 लोगों को पकड़ा था, जबकि 2023 में अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने 27 लोगों को गिरफ्तार किया था। अधिकारियों का मानना है कि इस बार जुए का संचालन पहले से भी कहीं ज़्यादा संगठित तरीके से किया जा रहा था।
छापेमारी की रणनीति और अड्डे का ढाँचा
पुलिस ने इस कार्रवाई को बेहद सावधानी से अंजाम दिया। पुख्ता सूचना मिलने के बाद SMC ने पुष्टि के लिए करीब 30 मिनट का समय लिया और फिर 20-25 कर्मियों की पांच टीमें बनाईं। छापेमारी के लिए रविवार शाम का व्यस्त समय चुना गया ताकि पुलिसकर्मी आसानी से भीड़ में घुल-मिल सकें। एक अधिकारी ने बताया कि टीमें अलग-अलग रास्तों से एक साथ परिसर में घुसीं, जिससे अंदर मौजूद लोगों को भागने का कोई मौका नहीं मिला।
जांचकर्ताओं के मुताबिक, जिमखाना का ढाँचा ही जुए को छिपाने के लिए डिज़ाइन किया गया था। मुख्य द्वार से जुए की गतिविधि का कोई अंदाज़ा नहीं लगता था। खिलाड़ियों को पहली मंजिल पर बने एक हॉल में जाना होता था, जहाँ लगभग 20-22 मेजें लगी हुई थीं। पूरे परिसर में CCTV कैमरे लगे थे, यहाँ तक कि क्लब की ओर आने वाली गली पर भी नज़र रखी जा रही थी।
कोडवर्ड वाली पर्चियों से चल रहा था खेल
इस रैकेट का सबसे चौंकाने वाला पहलू पैसों के लेन-देन का तरीका था। खिलाड़ी जुए की मेज़ पर सीधे नकदी नहीं लाते थे। इसके बजाय, वे ग्राउंड फ्लोर पर बने एक ऑफिस में पैसे जमा करते थे, जिसके बदले उन्हें हाथ से लिखी एक पर्ची दी जाती थी। इन पर्चियों पर असली रकम की जगह कोड लिखे होते थे। उदाहरण के लिए, 5,000 रुपये जमा करने पर खिलाड़ी को "50" लिखी पर्ची मिलती थी। हर टेबल पर एक कर्मचारी रजिस्टर में खिलाड़ी का नाम और कोड वाली रकम दर्ज करता था।
अधिकारियों के अनुसार, एक टेबल पर छह खिलाड़ी बैठते थे और हर खेल के बाद संचालक को 300 रुपये का कमीशन मिलता था। जीत-हार का सारा हिसाब-किताब इन्हीं सांकेतिक आंकड़ों में रखा जाता था, ताकि पुलिस की पकड़ में आने पर इसे महज़ मनोरंजन के लिए ताश का खेल बताया जा सके।
डिजिटल लेनदेन और आगे की जांच
इस प्रणाली के कारण ही 187 लोगों की मौजूदगी के बावजूद पुलिस को मौके से करीब 33 लाख रुपये नकद ही मिले। यह नकदी भी जुए की मेजों पर नहीं, बल्कि तलाशी के दौरान छिपाई हुई मिली। जांचकर्ताओं का मानना है कि यह रकम कुल सट्टेबाजी का एक छोटा सा हिस्सा है। अब पुलिस रैकेट के पूरे वित्तीय नेटवर्क का पता लगाने के लिए UPI लेनदेन और बैंक खातों की गहन जांच कर रही है। मुख्य संचालक समेत नौ आरोपियों की पुलिस रिमांड भी इसीलिए मांगी गई है, ताकि डिजिटल पेमेंट के ज़रिए हुए लेन-देन का खुलासा हो सके।
इनपुट: IANS



