मुनाफ़े में उछाल के बावजूद क्यों गिरे इंडसइंड बैंक के शेयर? जानिए पूरी वजह
इंडसइंड बैंक ने चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में शानदार मुनाफा दर्ज किया है, लेकिन इसके बावजूद गुरुवार को शेयर बाजार में इसके स्टॉक में 6% से ज्यादा की गिरावट देखी गई। बीएसई पर कारोबार के दौरान…
इंडसइंड बैंक ने चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में शानदार मुनाफा दर्ज किया है, लेकिन इसके बावजूद गुरुवार को शेयर बाजार में इसके स्टॉक में 6% से ज्यादा की गिरावट देखी गई। बीएसई पर कारोबार के दौरान बैंक का शेयर 6.30 प्रतिशत तक लुढ़ककर 999.25 रुपए के निचले स्तर पर पहुंच गया था। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, यह गिरावट बैंक द्वारा बुधवार को जारी किए गए वित्तीय नतीजों के ठीक बाद आई।
खबर लिखे जाने तक, स्टॉक 6.13 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,004.30 रुपए पर कारोबार कर रहा था। दिलचस्प बात यह है कि बैंक के वित्तीय आंकड़े काफी सकारात्मक थे, जिससे निवेशकों की यह प्रतिक्रिया थोड़ी चौंकाने वाली लगती है।
शानदार तिमाही नतीजे
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (Q1) के लिए इंडसइंड बैंक का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट बढ़कर 1,037.05 करोड़ रुपए हो गया। पिछले साल की इसी तिमाही में यह आंकड़ा 604.07 करोड़ रुपए था। बैंक के मुनाफे में इस उछाल का एक बड़ा कारण प्रोविजन और कंटिन्जेंसी में आई 21% की कमी रही, जो घटकर 1,384 करोड़ रुपए रह गई। इसके अलावा, बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) भी सालाना आधार पर 1% बढ़कर 4,685 करोड़ रुपए हो गई।
NPA और स्लिपेज में भी सुधार
बैंक की संपत्ति की गुणवत्ता में भी सुधार दिखा। इसका ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (GNPA) अनुपात बेहतर होकर 3.25 प्रतिशत हो गया। वहीं, ग्रॉस स्लिपेज (नए खराब लोन) भी पिछले साल के 2,567 करोड़ रुपए से घटकर इस तिमाही में 1,660 करोड़ रुपए रह गया। इन सकारात्मक आंकड़ों के बावजूद शेयर में गिरावट ने बाजार को हैरान किया।
पुराने आरोपों का साया?
हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब बैंक के शेयरों पर दबाव बना है। जून महीने में भी स्टॉक में कमजोरी आई थी, जब मीडिया में एक व्हिसलब्लोअर की शिकायत की खबरें सामने आई थीं। इस शिकायत में बैंक के अंदर कथित इनसाइडर ट्रेडिंग, कॉरपोरेट गवर्नेंस में खामियों और ऑडिट संबंधी गड़बड़ियों की जांच की मांग की गई थी। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस (SFIO) समेत कई सरकारी एजेंसियों को भेजी गई थी।
शिकायतकर्ता ने वित्तीय रिकॉर्ड में हेरफेर, माइक्रोफाइनेंस लोन की एवरग्रीनिंग (पुराने लोन चुकाने के लिए नए लोन देना) और वरिष्ठ प्रबंधन द्वारा अनियमितताओं को छिपाने जैसे गंभीर आरोप लगाए थे।
इनपुट: IANS



