हॉर्मुज संकट में भी भारत में ईंधन बाधित नहीं हुआ — विशेषज्ञों ने बताई इस लचीलेपन की वजह
जब करीब चार महीनों तक हॉर्मुज स्ट्रेट बंद रहा और दुनिया के कई देशों को ईंधन राशनिंग जैसे कड़े आपातकालीन उपाय अपनाने पड़े, तब भारत के आम नागरिक को पेट्रोल पंप पर कोई लाइन नहीं लगानी पड़ी, एलपीजी सिलेंड
जब करीब चार महीनों तक हॉर्मुज स्ट्रेट बंद रहा और दुनिया के कई देशों को ईंधन राशनिंग जैसे कड़े आपातकालीन उपाय अपनाने पड़े, तब भारत के आम नागरिक को पेट्रोल पंप पर कोई लाइन नहीं लगानी पड़ी, एलपीजी सिलेंडर बराबर मिलता रहा और खुदरा कीमतें भी लगभग स्थिर रहीं। ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि यह महज़ संयोग नहीं, बल्कि सुनियोजित नीति और मज़बूत बुनियादी ढाँचे का नतीजा है।
विशेषज्ञों की राय: आपदा की आशंका धरी रह गई
IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) के पूर्व चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर एम.के. सुराना ने बताया कि पश्चिम एशिया में संघर्ष छिड़ने और हॉर्मुज स्ट्रेट से शिपिंग बाधित होने के बाद अधिकांश विश्लेषकों को यही लगा था कि भारत गंभीर ऊर्जा संकट में फँस जाएगा। उनके शब्दों में, "जब टकराव शुरू हुआ और होर्मुज स्ट्रेट बंद हो गया, तो ज्यादातर जानकारों को लगा था कि 85 प्रतिशत आयातित कच्चे तेल पर निर्भर भारत की आपूर्ति थप हो जाएगी और देश में पेट्रोल की कमी हो जाएगी।"
सुराना ने आगे कहा, "एलपीजी भी नहीं मिल पाती। भारी कमी हो जाती और बड़े पैमाने पर कामकाज बंद हो जाता। हैरानी की बात है कि जहां दुनिया भर के कई देशों को ऑड-ईवन फ्यूल राशनिंग, अनिवार्य रूप से घर से काम करने और शाम 5 बजे पेट्रोल पंप बंद करने जैसे आपातकालीन उपाय लागू करने पड़े, वहीं भारत के नागरिकों को ऐसे किसी भी आपातकालीन उपाय का सामना नहीं करना पड़ा।"
इंजीनियर्स इंडिया की पूर्व प्रमुख ने भी सराहा
इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड की पूर्व चेयरमैन और एमडी वर्तिका शुक्ला ने इस स्थिरता के पीछे तीन प्रमुख कारण गिनाए — समय रहते आपूर्ति स्रोतों का विविधीकरण, ऊर्जा बुनियादी ढाँचे में पर्याप्त निवेश और सरकारी स्तर पर बेहतर समन्वय। उन्होंने कहा कि इन्हीं वजहों से आपूर्ति श्रृंखला में आई रुकावटों का असर खुदरा कीमतों तक नहीं पहुँच पाया।
40 से अधिक देशों से आयात की रणनीति रही कारगर
सुराना ने बताया कि सरकार ने कच्चे तेल के आयात को किसी एक क्षेत्र या देश पर निर्भर रखने की बजाय 40 से ज़्यादा देशों तक फैलाने की जो दीर्घकालिक रणनीति अपनाई थी, उसी ने हॉर्मुज संकट के दौरान सबसे बड़ी भूमिका निभाई। घरेलू कुकिंग गैस की आपूर्ति निर्बाध बनाए रखने के लिए माँग और आपूर्ति — दोनों पक्षों पर एक साथ उपाय किए गए और घरेलू खपत को प्राथमिकता दी गई।
इस पूरी कामयाबी का श्रेय सुराना ने पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय, सार्वजनिक क्षेत्र की तेल मार्केटिंग कंपनियों और संबंधित सरकारी एजेंसियों के सामूहिक प्रयासों को दिया। विशेषज्ञों के अनुसार, यह संकट भारत के ऊर्जा क्षेत्र के लिए एक परीक्षा थी — और देश उसमें खरा उतरा।
इनपुट: IANS



