एक दशक में 5 गुना बढ़ सकती है भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था, स्टार्टअप्स और निजी निवेश से मिल रही नई उड़ान
भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था (Space Economy) आने वाले एक दशक में लगभग पांच गुना बढ़कर 40-45 अरब डॉलर तक पहुंचने की क्षमता रखती है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में यह…
भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था (Space Economy) आने वाले एक दशक में लगभग पांच गुना बढ़कर 40-45 अरब डॉलर तक पहुंचने की क्षमता रखती है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में यह अर्थव्यवस्था 9 अरब डॉलर की है और इसका तेज़ विस्तार मुख्य रूप से बढ़ते स्टार्टअप इकोसिस्टम और सरकार द्वारा किए गए नीतिगत सुधारों से प्रेरित है।
यह अहम जानकारी उस समय सामने आई है जब भारत रविवार को अपना राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस मना रहा है। देश का अंतरिक्ष इकोसिस्टम पिछले कुछ वर्षों में अभूतपूर्व गति से बढ़ा है। साल 2014 में जहाँ सिर्फ एक पंजीकृत अंतरिक्ष स्टार्टअप था, वहीं अगस्त 2024 तक यह संख्या बढ़कर लगभग 440 हो गई है।
निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी
आंकड़े बताते हैं कि 2020 में अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलने का फैसला एक बड़ा बदलाव साबित हुआ है। इस कदम ने सैटेलाइट, लॉन्च सिस्टम और स्पेस एप्लीकेशन जैसे क्षेत्रों में उद्योगों और स्टार्टअप्स की भागीदारी का रास्ता खोल दिया। इसके बाद से निजी निवेश में भी भारी उछाल आया है। वित्त वर्ष 2021-22 में 100.5 मिलियन डॉलर का निवेश 31 मार्च, 2026 तक बढ़कर 618.5 मिलियन डॉलर हो गया, जो लगभग छह गुना वृद्धि है। सिर्फ 2026 में ही अब तक 187 मिलियन डॉलर का निवेश दर्ज किया जा चुका है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2026 के मध्य तक 52 गैर-सरकारी संस्थाओं (NGEs) को 113 अधिकार पत्र जारी किए गए हैं। इनमें 18 स्टार्टअप्स भी शामिल हैं, जिन्हें सैटेलाइट संचालन, पेलोड स्थापित करने और लॉन्च सेवाओं के लिए मंजूरी मिली है।
नीतिगत सुधार और संस्थाओं की भूमिका
एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023 ने इस क्षेत्र की पूरी वैल्यू चेन में निजी भागीदारी को और मज़बूत किया है। इस नीति ने दो प्रमुख संस्थाओं—न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) और भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (IN-SPACe)—की भूमिकाओं को भी स्पष्ट किया है।
NSIL: इसरो की इस वाणिज्यिक शाखा का राजस्व वित्त वर्ष 2021-22 के 321.77 करोड़ रुपए से बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में 3,000 करोड़ रुपए से अधिक हो गया। यह भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के बढ़ते व्यावसायीकरण का स्पष्ट संकेत है। NSIL लॉन्च, सैटेलाइट और अंतरिक्ष आधारित सेवाएं प्रदान करता है।
IN-SPACe: यह संस्था एक सिंगल-विंडो सिस्टम के तौर पर काम करती है, जो निजी अंतरिक्ष गतिविधियों को बढ़ावा देती है। 31 जनवरी, 2026 तक इन-स्पेस ने उद्योगों और स्टार्टअप्स को इसरो की 71 तकनीकों के हस्तांतरण में मदद की है।
इनपुट: IANS



