भारतीय अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदली: कच्चे तेल में नरमी और FPI की वापसी से ग्रोथ की उम्मीदें मज़बूत
भारत की मैक्रोइकोनॉमिक यानी वृहद आर्थिक स्थिति अब पहले से कहीं ज़्यादा मज़बूत नज़र आ रही है, और भविष्य में इसके और बेहतर होने की प्रबल संभावना है। समाचार एजेंसी IANS के हवाले से जारी एक नई रिपोर्ट के
भारत की मैक्रोइकोनॉमिक यानी वृहद आर्थिक स्थिति अब पहले से कहीं ज़्यादा मज़बूत नज़र आ रही है, और भविष्य में इसके और बेहतर होने की प्रबल संभावना है। समाचार एजेंसी IANS के हवाले से जारी एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, इस सुधार के पीछे कई बड़े कारण हैं, जिनमें अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की बिकवाली में कमी और भारतीय रुपए से जुड़ी संपत्तियों का आकर्षक मूल्यांकन शामिल है।
डीएसपी की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि इन सकारात्मक बदलावों के चलते भारत की आर्थिक विकास की संभावनाएं पहले से अधिक उज्ज्वल हुई हैं। रिपोर्ट में इस बात पर भी ज़ोर दिया गया है कि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत का 'बैलेंस ऑफ पेमेंट' (भुगतान संतुलन), जो पहले एक चिंता का विषय माना जा रहा था, अब अर्थव्यवस्था की एक बड़ी ताक़त बनकर उभर सकता है।
अर्थव्यवस्था को मज़बूती देने वाले प्रमुख कारक
रिपोर्ट के अनुसार, कई तत्वों ने मिलकर भारत की आर्थिक तस्वीर को सुधारा है। रुपए में निवेश की गई संपत्तियों पर बेहतर रिटर्न मिल रहा है और रुपए का 'रियल इफेक्टिव एक्सचेंज रेट' (REER) बेहद आकर्षक स्तर पर है। मई 2026 में भारत का REER 88 से नीचे आ गया था, जो आमतौर पर केवल गंभीर आर्थिक संकट के समय ही देखा जाता है। इसके अलावा, भारत और अमेरिका के बीच महंगाई का अंतर कम होने से लंबे समय में रुपए के तेज़ी से कमज़ोर होने का ख़तरा भी घट गया है।
कॉरपोरेट जगत और शेयर बाज़ार पर असर
डीएसपी का मानना है कि बेहतर आर्थिक वृद्धि, ख़ासकर नॉमिनल ग्रोथ, भारतीय कॉरपोरेट जगत की बिक्री को रफ़्तार देगी, जिससे कंपनियों के प्रदर्शन में सुधार होगा। रिपोर्ट में शेयर बाज़ार के निवेशकों के लिए लार्ज-कैप यानी बड़ी कंपनियों के शेयरों को सबसे आकर्षक विकल्प बताया गया है। अगर कंपनियों की आय में सुधार होता है, तो इन शेयरों का प्रदर्शन बेहतर रह सकता है। वहीं, निफ्टी आईटी कंपनियों के शेयर मूल्यांकन के हिसाब से सस्ते तो हैं, लेकिन उनकी भविष्य की विकास दर को लेकर कुछ चिंताएं बनी हुई हैं।
अर्थव्यवस्था में सुधार के अन्य संकेत
रिपोर्ट यह भी बताती है कि देश में अतिरिक्त उत्पादन क्षमता उपलब्ध है और मांग धीरे-धीरे पटरी पर लौट रही है, जो भविष्य के लिए अच्छा संकेत है। आर्थिक गतिविधियों में तेज़ी से क्रेडिट ग्रोथ मज़बूत होगी। साथ ही, निर्माण गतिविधियों में बढ़ोतरी से सीमेंट उद्योग को बड़ा फ़ायदा मिलने की उम्मीद है, जिससे इस सेक्टर के प्रदर्शन में भी सुधार आ सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत अब उभरते बाज़ारों की तुलना में एक बेहतर और विपरीत निवेश अवसर के रूप में सामने आ रहा है।
इनपुट: IANS



