रविवार, 2 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
इकोनॉमी

आर्थिक सुस्ती के बीच भारतीय रत्न और आभूषण निर्यात में उछाल, जून में 26% से ज़्यादा की बढ़त

लंबे समय से वैश्विक आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहे भारत के रत्न और आभूषण सेक्टर के लिए एक अच्छी खबर आई है। समाचार एजेंसी IANS के आंकड़ों के मुताबिक, इस साल जून महीने में इस क्षेत्र के कुल निर्या…

आर्थिक सुस्ती के बीच भारतीय रत्न और आभूषण निर्यात में उछाल, जून में 26% से ज़्यादा की बढ़त
(फोटो: IANS)

लंबे समय से वैश्विक आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहे भारत के रत्न और आभूषण सेक्टर के लिए एक अच्छी खबर आई है। समाचार एजेंसी IANS के आंकड़ों के मुताबिक, इस साल जून महीने में इस क्षेत्र के कुल निर्यात में सालाना आधार पर 26.5% की शानदार बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो 2.21 अरब डॉलर तक पहुंच गया। यह सकारात्मक बदलाव एक ऐसे समय में हुआ है जब पिछली कुछ तिमाहियों में निर्यात में कमी देखी जा रही थी।

विज्ञापन

हालांकि, अगर पूरे वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून 2026) के आंकड़ों को देखें, तो निर्यात लगभग पिछले साल के स्तर पर ही स्थिर रहा। इस अवधि में कुल 6.61 अरब डॉलर का निर्यात हुआ, जो पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में सिर्फ 0.04% ज़्यादा है। वहीं, जून 2026 में कुल आयात 10.06% बढ़कर 1.72 अरब डॉलर हो गया, लेकिन पूरी तिमाही में आयात 5.9% घटकर 4.97 अरब डॉलर ही रहा।

हीरे और सोने के आभूषणों ने बढ़ाई चमक

निर्यात में इस उछाल का नेतृत्व सोने और तराशे हुए हीरों ने किया। जून में सोने के आभूषणों का निर्यात 54.5% बढ़कर 1.09 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जिसमें जड़ाऊ आभूषणों की हिस्सेदारी सबसे ज़्यादा रही। इसी तरह, कटे और पॉलिश किए गए हीरों का निर्यात भी जून में 8.7% बढ़कर 84.67 करोड़ डॉलर हो गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में हीरे के आभूषणों की मांग में वापसी का संकेत है, जिससे आने वाले त्योहारी सीज़न में बिक्री और बेहतर होने की उम्मीद है।

कच्चे हीरे का आयात घटा, लैब-ग्रोन की मांग बढ़ी

एक तरफ जहां तैयार माल का निर्यात बढ़ा है, वहीं दूसरी ओर कच्चे (अपरिष्कृत) हीरों का आयात कम हुआ है। अप्रैल-जून तिमाही में कच्चे हीरे का आयात सालाना आधार पर 32.4% घट गया। इसकी मुख्य वजह यह है कि विदेशी बाजारों में मांग की अनिश्चितता को देखते हुए भारतीय निर्माता नया माल खरीदने के बजाय अपने मौजूदा स्टॉक को खत्म करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

इसी बीच, लैब में तैयार हीरों को अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में काफी पसंद किया जा रहा है। विशेषज्ञ बताते हैं कि आर्थिक अनिश्चितता के दौर में ग्राहक कीमतों को लेकर अधिक सजग हो गए हैं, और यह श्रेणी प्राकृतिक हीरों का एक आकर्षक विकल्प बनकर उभरी है।

चांदी और प्लैटिनम में भी उछाल

सिर्फ सोना-हीरा ही नहीं, बल्कि अन्य कीमती धातुओं के निर्यात ने भी अच्छा प्रदर्शन किया। वित्त वर्ष की पहली तिमाही के दौरान चांदी और प्लैटिनम के आभूषणों के निर्यात में भी 20% से 27% तक की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। विश्लेषकों का अनुमान है कि निर्यात में यह सकारात्मक रुझान अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में और भी मजबूत हो सकता है।

इनपुट: IANS

N

News4Social बिज़नेस डेस्क

News4Social बिज़नेस डेस्क — IANS समेत लाइसेंस-प्राप्त समाचार एजेंसियों की फीड से कारोबार और अर्थव्यवस्था से जुड़ी ताज़ा व प्रामाणिक खबरें संपादकीय समीक्षा के बाद प्रकाशित करता है। हर खबर उसके स्रोत के श्रेय (credit) के साथ दी जाती है। सभी लेख देखें →

आगे पढ़ें

और देखें →