शुक्रवार, 24 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
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भारत का विदेशी मुद्रा भंडार लगातार दूसरे हफ्ते बढ़ा, 676 अरब डॉलर के पार पहुँचा

भारत के आर्थिक बफर यानी विदेशी मुद्रा भंडार में लगातार दूसरे सप्ताह बढ़ोतरी दर्ज की गई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा शुक्रवार को जारी नवीनतम आँकड़ों के अनुसार, 17 जुलाई को समाप्त हुए सप्ताह में…

भारत का विदेशी मुद्रा भंडार लगातार दूसरे हफ्ते बढ़ा, 676 अरब डॉलर के पार पहुँचा
(फोटो: IANS)

भारत के आर्थिक बफर यानी विदेशी मुद्रा भंडार में लगातार दूसरे सप्ताह बढ़ोतरी दर्ज की गई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा शुक्रवार को जारी नवीनतम आँकड़ों के अनुसार, 17 जुलाई को समाप्त हुए सप्ताह में देश का कुल विदेशी मुद्रा भंडार 1.08 अरब डॉलर बढ़कर 676.237 अरब डॉलर पर पहुँच गया है।

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समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इससे ठीक पहले वाले सप्ताह में भी विदेशी मुद्रा भंडार में 964 मिलियन डॉलर का इजाफा हुआ था, जिससे यह 675.157 अरब डॉलर हो गया था। यह बढ़ोतरी वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत है। इस साल 27 फरवरी को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 728.494 अरब डॉलर के अपने सर्वकालिक उच्च स्तर पर था।

भंडार के घटकों में क्या बदलाव आया?

विदेशी मुद्रा भंडार कई हिस्सों से मिलकर बनता है, जिनमें इस सप्ताह मिला-जुला रुख देखने को मिला। विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियाँ (Foreign Currency Assets - FCA), जो कि कुल भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा हैं, 4.549 अरब डॉलर बढ़कर 551.057 अरब डॉलर हो गईं। FCA के मूल्य पर डॉलर के मुकाबले यूरो, पाउंड और येन जैसी अन्य विदेशी मुद्राओं की कीमतों में आने वाले उतार-चढ़ाव का भी असर पड़ता है।

इसके विपरीत, देश के स्वर्ण भंडार (Gold Reserve) का मूल्य 3.48 अरब डॉलर घटकर 101.749 अरब डॉलर रह गया। वहीं, विशेष आहरण अधिकार (Special Drawing Rights - SDR) में 44 मिलियन डॉलर की मामूली बढ़ोतरी हुई और यह 18.67 अरब डॉलर पर पहुँच गया।

क्यों महत्वपूर्ण है विदेशी मुद्रा भंडार?

आरबीआई के अनुसार, यह भंडार देश को बाहरी आर्थिक झटकों से बचाने में मदद करता है। यह रुपए की स्थिरता बनाए रखने और देश के आयात व अन्य विदेशी भुगतानों को पूरा करने के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है। आरबीआई ने बताया कि हाल में पश्चिम एशिया में तनाव के दौरान रुपए पर दबाव कम करने के लिए उसने डॉलर बेचे थे, जिससे भंडार में कुछ कमी आई थी, लेकिन अब स्थिति फिर सुधर रही है। केंद्रीय बैंक स्पष्ट करता है कि वह बाजार में केवल अत्यधिक उतार-चढ़ाव को रोकने के लिए हस्तक्षेप करता है, किसी विशेष विनिमय दर को लक्षित करने के लिए नहीं।

इनपुट: IANS

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