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भारत में पेट्रोल-डीज़ल की माँग में उछाल, लेकिन रसोई गैस की खपत में भारी गिरावट

अगस्त महीने में भारत की अर्थव्यवस्था में तेज़ी के संकेत दिख रहे हैं, जिसका एक बड़ा पैमाना पेट्रोल और डीज़ल की खपत में हुई ज़ोरदार बढ़ोतरी है। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, पेट्रोलियम और प्राकृतिक…

भारत में पेट्रोल-डीज़ल की माँग में उछाल, लेकिन रसोई गैस की खपत में भारी गिरावट
(फोटो: IANS)

अगस्त महीने में भारत की अर्थव्यवस्था में तेज़ी के संकेत दिख रहे हैं, जिसका एक बड़ा पैमाना पेट्रोल और डीज़ल की खपत में हुई ज़ोरदार बढ़ोतरी है। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के आँकड़े बताते हैं कि पिछले साल के इसी महीने की तुलना में इन दोनों ईंधनों की माँग बढ़ी है। यह बढ़ोतरी देश में बढ़ी हुई आर्थिक गतिविधियों की ओर इशारा करती है।

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देश में सबसे ज़्यादा इस्तेमाल होने वाले ईंधन डीज़ल की खपत 6.46 प्रतिशत बढ़कर 7.00 मिलियन टन हो गई, जो पिछले साल अगस्त में 6.58 मिलियन टन थी। वहीं, पेट्रोल की बिक्री में भी 7.88 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई और यह 3.54 मिलियन टन से बढ़कर 3.82 मिलियन टन पर पहुँच गई।

पेट्रोल-डीज़ल की माँग क्यों बढ़ी?

डीज़ल: इसकी खपत बढ़ने के पीछे कई कारण हैं। देश में हाईवे नेटवर्क का तेज़ी से विस्तार हो रहा है, जिससे माल की ढुलाई बढ़ी है। खेती-किसानी में भी ट्रैक्टरों की संख्या बढ़ने से डीज़ल की माँग बढ़ी है। इसके अलावा, इस साल अगस्त में मानसून कमज़ोर रहने के कारण किसानों को सिंचाई के लिए डीज़ल से चलने वाले पंपों का अधिक इस्तेमाल करना पड़ा, जिससे खपत को और बढ़ावा मिला।

पेट्रोल: बढ़ती अर्थव्यवस्था के साथ शहरी और ग्रामीण, दोनों ही क्षेत्रों में कारों और दोपहिया वाहनों की बिक्री में इज़ाफ़ा हुआ है। गाड़ियों की यही बढ़ी हुई संख्या पेट्रोल की बिक्री बढ़ने का मुख्य कारण है।

रसोई गैस (LPG) की खपत गिरी

एक तरफ जहाँ पेट्रोल-डीज़ल की माँग बढ़ी, वहीं दूसरी ओर रसोई में इस्तेमाल होने वाली लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) की खपत में भारी गिरावट आई। सरकारी आँकड़ों के अनुसार, अगस्त में एलपीजी की खपत सालाना आधार पर 16.15 प्रतिशत घट गई। यह पिछले साल के 2.89 मिलियन टन के मुक़ाबले घटकर 2.42 मिलियन टन रह गई।

इस गिरावट का एक बड़ा कारण अंतरराष्ट्रीय संकट है। पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधाएँ आई हैं, जहाँ से दुनिया का 20% तेल और गैस गुज़रता है। भारत अपनी ज़रूरत की 50% से ज़्यादा एलपीजी इसी रास्ते से आयात करता है, लेकिन अब उसे दूर के देशों से ईंधन मँगाना पड़ रहा है, जिससे आयात प्रभावित हुआ है। सरकार संकट से निपटने के लिए ग्राहकों को पाइप वाली नेचुरल गैस (पीएनजी) अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है और इसके लिए इंसेंटिव भी दे रही है।

इनपुट: IANS

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News4Social बिज़नेस डेस्क

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