गुरूवार, 8 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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भारतीय बाज़ार में बढ़ा निवेशकों का भरोसा, तीसरी तिमाही में हुए 37 अरब डॉलर के सौदे

भारतीय अर्थव्यवस्था में निवेशकों का भरोसा मज़बूत बना हुआ है, जिसका ताज़ा प्रमाण चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही के डील-मेकिंग आंकड़ों से मिलता है। समाचार एजेंसी IANS को मिली ग्रांट थॉर्नटन भारत की एक…

भारतीय बाज़ार में बढ़ा निवेशकों का भरोसा, तीसरी तिमाही में हुए 37 अरब डॉलर के सौदे
(फोटो: IANS)

भारतीय अर्थव्यवस्था में निवेशकों का भरोसा मज़बूत बना हुआ है, जिसका ताज़ा प्रमाण चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही के डील-मेकिंग आंकड़ों से मिलता है। समाचार एजेंसी IANS को मिली ग्रांट थॉर्नटन भारत की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस अवधि में विलय-अधिग्रहण (M&A), प्राइवेट इक्विटी (PE) और सार्वजनिक बाज़ार (Public Markets) को मिलाकर कुल 36.9 अरब डॉलर के 696 सौदे हुए। ये आँकड़े बाज़ार में सकारात्मक माहौल और विभिन्न क्षेत्रों में निवेश के व्यापक अवसरों की ओर इशारा करते हैं।

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ग्रांट थॉर्नटन भारत की ग्रोथ पार्टनर शांति विजेता ने इन आंकड़ों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अलग-अलग माध्यमों में बढ़ती गतिविधियां इस बात का संकेत हैं कि भारत में निवेशकों का विश्वास कायम है और विभिन्न क्षेत्रों में अवसरों की कोई कमी नहीं है।

विलय-अधिग्रहण और विदेशी निवेश का हाल

रिपोर्ट के मुताबिक, तीसरी तिमाही में कुल 255 विलय और अधिग्रहण (M&A) सौदे हुए, जिनकी कुल कीमत 13.2 अरब डॉलर थी। सौदों की संख्या में पिछली तिमाही के मुकाबले 7% की बढ़ोतरी हुई, लेकिन इनकी कुल वैल्यू में 53% की गिरावट आई, जिसका मुख्य कारण दूसरी तिमाही का तुलनात्मक रूप से बहुत ऊँचा आधार होना था। इस दौरान 5 बड़े सौदे हुए, जिनका मूल्य एक अरब डॉलर से ज़्यादा था और इनकी कुल कीमत 7.9 अरब डॉलर रही।

विदेशी निवेश के मोर्चे पर शानदार प्रदर्शन देखने को मिला। भारत में आने वाले निवेश (Inbound Investment) के सौदों की संख्या पिछले आठ सालों में किसी भी तिमाही के मुकाबले सबसे ज़्यादा रही। इन सौदों की कुल कीमत पिछली तिमाही से 2.6 गुना बढ़कर 4.2 अरब डॉलर तक पहुँच गई। हालाँकि, भारत से बाहर किए जाने वाले निवेश (Outbound Investment) में 74% की गिरावट के साथ यह आँकड़ा 6.1 अरब डॉलर पर आ गया।

पब्लिक मार्केट और प्रमुख सेक्टर

सार्वजनिक बाज़ारों, यानी शेयर बाज़ारों में भी काफ़ी हलचल रही। इस तिमाही में 60 आईपीओ (Initial Public Offerings) के ज़रिए 9 अरब डॉलर की रिकॉर्ड रकम जुटाई गई, जो अब तक किसी एक तिमाही में जुटाई गई सबसे बड़ी राशि है। इसके अलावा, 28 क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) के माध्यम से 4.8 अरब डॉलर की पूंजी जुटाई गई।

सेक्टरों के हिसाब से देखें तो 2026 में पहली बार ऊर्जा और प्राकृतिक संसाधन क्षेत्र सबसे आगे रहा, जहाँ 3 अरब डॉलर के 38 सौदे हुए। इसके बाद इन्फ्रास्ट्रक्चर मैनेजमेंट सेक्टर में 2.8 अरब डॉलर के 26 सौदे दर्ज किए गए। सौदों की संख्या के लिहाज़ से रिटेल और कंज्यूमर सेक्टर 113 सौदों के साथ सबसे सक्रिय रहा, जिनकी कुल कीमत 948 मिलियन डॉलर थी।

इनपुट: IANS

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News4Social बिज़नेस डेस्क

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