GST नियमों में बड़ा बदलाव: अब टैक्स अधिकारी नहीं कर सकेंगे गिरफ़्तार, मुकदमा चलाने की सीमा भी बढ़ी
व्यापार करने की प्रक्रिया को आसान बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए जीएसटी परिषद ने कई महत्वपूर्ण बदलावों को मंज़ूरी दी है। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, इन बदलावों में सबसे प्रमुख यह है कि अब…
व्यापार करने की प्रक्रिया को आसान बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए जीएसटी परिषद ने कई महत्वपूर्ण बदलावों को मंज़ूरी दी है। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, इन बदलावों में सबसे प्रमुख यह है कि अब कर अधिकारियों के पास गिरफ़्तारी करने की शक्ति नहीं होगी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को हुई 57वीं जीएसटी परिषद की बैठक के बाद यह जानकारी दी।
इसके अलावा, कर संबंधी मामलों में मुकदमा चलाने के लिए न्यूनतम सीमा को भी बढ़ा दिया गया है। पहले यह सीमा 1 करोड़ रुपए थी, जिसे अब बढ़ाकर 5 करोड़ रुपए कर दिया गया है। वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि पिछले साल सरकार का ध्यान जीएसटी दरों को कम करने पर था, जबकि इस साल प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर ज़ोर दिया जा रहा है।
कारोबारियों के लिए अन्य राहतें
बैठक में कई और फैसले भी लिए गए जो कारोबारियों, खासकर छोटे विक्रेताओं के लिए राहत भरे हैं। अब जीएसटी पंजीकरण में सामान्य बदलावों के लिए स्वतः अनुमति मिल जाएगी। रिफंड प्रक्रिया को भी तेज़ किया गया है, जिसके तहत स्वीकृति की अवधि 15 दिन से घटाकर 10 दिन कर दी गई है। साथ ही, 90 प्रतिशत रिफंड अब 3 कामकाजी दिनों के भीतर जारी कर दिए जाएंगे।
ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर काम करने वाले छोटे विक्रेताओं को भी बड़ी राहत दी गई है। सीतारमण ने बताया, "ई-कॉमर्स ऑपरेटर्स के प्लेटफॉर्म पर छोटे विक्रेताओं के लिए जीएसटी रजिस्ट्रेशन की आसान प्रक्रिया से छोटे बिजनेस को हर राज्य में बिजनेस की जगह बनाए बिना सामान बेचने में मदद मिलेगी।"
UPI पेमेंट पर GST घटाने पर विचार
परिषद ने यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) पर लगने वाले मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) पर जीएसटी की दर को 18% से घटाकर 5% करने के प्रस्ताव पर भी चर्चा की। कई राज्यों ने 18% की मौजूदा दर पर चिंता जताई थी। नए UPI फ्रेमवर्क के तहत, ₹2,000 से अधिक के कुछ विशेष 'पर्सन-टू-मर्चेंट' लेनदेन पर 0.4% MDR लगाने की योजना है, हालांकि सरकार का कहना है कि लगभग 96% लेन-देन पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।
इनपुट: IANS



