भारतीय ऑटोमोबाइल बाज़ार में शानदार उछाल, जुलाई में सभी सेगमेंट में खुदरा बिक्री बढ़ी
भारत के ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए जुलाई का महीना अब तक शानदार रहा है। 1 से 23 जुलाई के बीच सभी श्रेणियों के वाहनों की खुदरा बिक्री में पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 28.6 प्रतिशत की ज़बरदस्त बढ़ोतरी…
भारत के ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए जुलाई का महीना अब तक शानदार रहा है। 1 से 23 जुलाई के बीच सभी श्रेणियों के वाहनों की खुदरा बिक्री में पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 28.6 प्रतिशत की ज़बरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह जानकारी चॉइस इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की एक हालिया रिपोर्ट में सामने आई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस उछाल में सबसे बड़ा योगदान ट्रैक्टर सेगमेंट का रहा, जिसकी बिक्री में सालाना आधार पर 36.8% की सबसे तेज़ वृद्धि हुई। दोपहिया वाहनों का बाज़ार भी पीछे नहीं रहा और इसमें 31% की मज़बूत बढ़त देखी गई।
विभिन्न श्रेणियों का प्रदर्शन
यात्री वाहनों (पैसेंजर व्हीकल्स) के सेगमेंट में भी मांग बनी हुई है। SUVs और पैसेंजर कारों की बिक्री में 20.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। वहीं, व्यावसायिक इस्तेमाल वाले कमर्शियल वाहनों की बिक्री 27.3 प्रतिशत बढ़ी, जबकि तिपहिया वाहनों की खुदरा बिक्री में 18.1 प्रतिशत का इज़ाफ़ा हुआ।
भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत
रिपोर्ट में भविष्य को लेकर भी उम्मीद जताई गई है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि जुलाई 2026 में ऑटो उद्योग में मज़बूत वृद्धि जारी रहेगी। इसके पीछे कई कारण बताए गए हैं, जैसे- जुलाई 2025 का कम बेस, ग्राहकों का स्थिर भरोसा, बाज़ार में नए मॉडलों का आना, इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती स्वीकार्यता, ब्याज दरों में नरमी और GST कटौती से ग्राहकों की बढ़ी हुई क्रय शक्ति।
आने वाले कुछ महीनों का दृष्टिकोण भी सकारात्मक दिख रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अगस्त-सितंबर 2026 का लो-बेस और वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी छमाही में त्योहारी सीज़न के चलते मांग में और तेज़ी आने की पूरी संभावना है।
निवेश और विस्तार की योजनाएँ
एक अन्य रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया गया है कि भारत का ऑटो और ऑटो एंसिलरी (सहायक उपकरण) क्षेत्र वित्त वर्ष 2026-27 में लगभग 8 प्रतिशत की दर से बढ़ सकता है। ब्रिकवर्क रेटिंग्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यह सेक्टर एक नए निवेश चक्र में प्रवेश कर रहा है, जिसके तहत वित्त वर्ष 2026-27 से 2028-29 के बीच 70,300 करोड़ रुपये की परियोजनाएं शुरू होने की उम्मीद है। इस निवेश को प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजनाओं और FAME-III जैसे सरकारी प्रोत्साहनों से भी बल मिल रहा है।
इनपुट: IANS



