बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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अकाउंट एग्रीगेटर: भारत में लोन बांटने का तरीका बदल रही है यह नई व्यवस्था, FY26 में बांटे ₹3.82 लाख करोड़

भारत में लोन लेने और देने की प्रक्रिया में एक बड़ा बदलाव आ रहा है, जिसका नाम है 'अकाउंट एग्रीगेटर' (AA) इकोसिस्टम। यह व्यवस्था वित्तीय जानकारी को सुरक्षित तरीके से साझा करने में मदद करती है, जिससे…

अकाउंट एग्रीगेटर: भारत में लोन बांटने का तरीका बदल रही है यह नई व्यवस्था, FY26 में बांटे ₹3.82 लाख करोड़
(फोटो: IANS)

भारत में लोन लेने और देने की प्रक्रिया में एक बड़ा बदलाव आ रहा है, जिसका नाम है 'अकाउंट एग्रीगेटर' (AA) इकोसिस्टम। यह व्यवस्था वित्तीय जानकारी को सुरक्षित तरीके से साझा करने में मदद करती है, जिससे कर्ज देने वाली संस्थाओं के लिए ग्राहकों की आर्थिक स्थिति का आकलन करना आसान हो जाता है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस इकोसिस्टम ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान 3.68 करोड़ लोन के जरिए कुल 3.82 लाख करोड़ रुपए का कर्ज बांटने में अहम भूमिका निभाई।

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रिपोर्ट के मुताबिक, यह आंकड़ा भारत में कुल रिटेल और MSME (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) लोन बाजार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। अब मूल्य के हिसाब से 8.4% और लोन की संख्या के हिसाब से 11.8% कर्ज अकाउंट एग्रीगेटर व्यवस्था के माध्यम से दिए जा रहे हैं।

सिक्योर्ड लोन और बैंकों की बढ़ती भागीदारी

शुरुआत में अकाउंट एग्रीगेटर का इस्तेमाल मुख्य रूप से बिना गारंटी वाले रिटेल लोन के लिए होता था, लेकिन अब इसका दायरा बढ़ रहा है। रिपोर्ट बताती है कि होम लोन और प्रॉपर्टी के बदले लोन जैसे सुरक्षित कर्जों (सिक्योर्ड क्रेडिट) के लिए भी इसका उपयोग तेजी से बढ़ा है। वित्त वर्ष 2025-26 में इस प्लेटफॉर्म के जरिए 20,777 करोड़ रुपए के 1.09 लाख होम और प्रॉपर्टी लोन दिए गए, जो पिछले साल की तुलना में 624% की शानदार सालाना बढ़ोतरी है।

इस विस्तार का एक बड़ा कारण बड़े वित्तीय संस्थानों का इसे अपनाना है। वित्त वर्ष 2026 की दूसरी छमाही में, AA के जरिए दिए गए कुल लोन में बैंकों की हिस्सेदारी बढ़कर 47.3% हो गई, जो अब गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) के लगभग बराबर है।

वित्तीय समावेशन को मिल रहा बढ़ावा

अकाउंट एग्रीगेटर फ्रेमवर्क उन लोगों तक भी कर्ज पहुंचाने में मदद कर रहा है, जिनका पहले कोई क्रेडिट रिकॉर्ड नहीं था। इस प्लेटफॉर्म से जुड़े संस्थानों के आंकड़ों से पता चलता है कि कुल वितरित लोन में से 18.2% 'न्यू-टू-क्रेडिट' यानी पहली बार कर्ज लेने वाले ग्राहक थे। इसके अलावा, महिला उधारकर्ताओं की हिस्सेदारी भी लोन की संख्या में 19.8% और कुल राशि में 19.1% रही, जो वित्तीय समावेशन का एक सकारात्मक संकेत है।

यह रिपोर्ट 'सहमति' द्वारा जारी की गई है, जो RBI से मान्यता प्राप्त अकाउंट एग्रीगेटर इकोसिस्टम की एक सेल्फ-रेगुलेटरी संस्था है। सहमति की मुख्य नीति और एडवोकेसी अधिकारी शालिनी गुप्ता ने कहा, "जैसे-जैसे अधिक वित्तीय सूचना स्रोत इस व्यवस्था से जुड़ेंगे, अकाउंट एग्रीगेटर फ्रेमवर्क कर्ज देने की प्रक्रिया को तेज, अधिक समावेशी और वित्तीय संस्थानों व ग्राहकों दोनों के लिए अधिक प्रभावी बनाने में मदद करेगा।"

भविष्य की संभावनाएं

रिपोर्ट का अनुमान है कि भविष्य में जब GST, CBDT (केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड) और EPFO (कर्मचारी भविष्य निधि संगठन) जैसे वित्तीय और आय से जुड़े स्रोत भी इस इकोसिस्टम से जुड़ जाएंगे, तो इसकी क्षमता और बढ़ेगी। इससे कैश फ्लो यानी नियमित आय के आधार पर कर्ज देने की व्यवस्था मजबूत होगी, जिससे रिटेल, MSME और सिक्योर्ड लेंडिंग के क्षेत्र में नए अवसर पैदा होंगे।

इनपुट: IANS

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