भारत-विरोधी नफ़रत का विरोध करने पर भारतीय-अमेरिकी छात्र पत्रकार को पद से हटाया गया: रिपोर्ट
अमेरिका में भारतीय-अमेरिकियों के प्रति बढ़ती शत्रुता पर चल रही बहस के बीच, टेक्सास के एक 21 वर्षीय छात्र पत्रकार को उनके पद से हटा दिया गया है। छात्र का आरोप है कि उन्हें इसलिए निकाला गया क्योंकि…
अमेरिका में भारतीय-अमेरिकियों के प्रति बढ़ती शत्रुता पर चल रही बहस के बीच, टेक्सास के एक 21 वर्षीय छात्र पत्रकार को उनके पद से हटा दिया गया है। छात्र का आरोप है कि उन्हें इसलिए निकाला गया क्योंकि उन्होंने भारतीयों के खिलाफ नफरत का विरोध करते हुए एक डेमोक्रेट उम्मीदवार को वोट दिया था। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह मामला अमेरिकी दक्षिणपंथी खेमे में भारतीय-अमेरिकियों के प्रति बढ़ते विद्वेष को उजागर करता है।
प्रभावित छात्र, वसंत भट्ट, ह्यूस्टन विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान के छात्र हैं और 'कैंपस रिफॉर्म' नामक एक कंजर्वेटिव मीडिया प्लेटफॉर्म के लिए काम करते थे। उन्होंने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर जानकारी दी कि भारतीयों के खिलाफ हो रही नफरत के विरोध में अपने संवैधानिक अधिकार का प्रयोग करने और रिपब्लिकन पार्टी की लाइन से असहमत होने के कारण संवाददाता के तौर पर उनकी भूमिका समाप्त कर दी गई है।
पूरा मामला और पृष्ठभूमि
यह विवाद तब शुरू हुआ जब भट्ट ने इस महीने की शुरुआत में घोषणा की कि उन्होंने टेक्सास सीनेट चुनाव में रिपब्लिकन केन पैक्सटन के बजाय डेमोक्रेट जेम्स टालारिको को वोट दिया था। उन्होंने अपने इस फैसले का कारण भारतीय-अमेरिकियों की पहचान पर हो रहे हमलों और बढ़ती विदेशियों-विरोधी सोच से अपनी परेशानी को बताया था। भट्ट ने दृढ़ता से कहा, "किसी कार्यक्रम में अपनी जगह खो देने से मैं अपने विचार नहीं बदलूंगा और न ही अपने समुदाय का साथ छोड़ूंगा।"
भट्ट का प्रोफाइल, जिसमें उन्हें 'सीनियर कॉरेस्पॉन्डेंट' बताया गया था, अब 'कैंपस रिफॉर्म' की वेबसाइट पर लेखकों की सूची से हटा दिया गया है। हालांकि, संस्थान ने भट्ट के दावों पर अभी तक कोई सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की है। गौरतलब है कि भट्ट पहले सीनेटर टेड क्रूज के पुनर्निर्वाचन अभियान में इंटर्नशिप कर चुके हैं और टेक्सास यूथ समिट के साथ भी काम किया है, जिसे राज्य के सबसे बड़े युवा रूढ़िवादी सम्मेलनों में से एक माना जाता है।
बढ़ती बयानबाजी पर चिंता
यह घटना ऐसे समय में हुई है जब 3 नवंबर के मिडटर्म चुनावों से पहले अमेरिकी राजनीति में भारतीयों के खिलाफ बयानबाजी तेज हो गई है। भारतीय मूल के उम्मीदवारों पर हमले, H-1B वीजा धारकों को निशाना बनाना और ऑनलाइन दुर्व्यवहार आम हो गया है। कई भारतीय मूल के अमेरिकी सांसदों ने चिंता जताई है कि यह नफरत भरी भाषा अब सिर्फ ऑनलाइन तक सीमित नहीं है, बल्कि हिंसा को भी उकसा रही है।
इस संदर्भ में, हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन की कार्यकारी निदेशक सुहाग शुक्ला ने भी भट्ट के खिलाफ हुए हमलों की आलोचना की। उन्होंने 'एक्स' पर एक व्यक्तिगत पोस्ट में इसकी तुलना उस माहौल से की जो इलिनोइस के ऑरोरा स्थित एक हिंदू मंदिर को निशाना बनाने की कथित साजिश से पहले बना था। बता दें कि 'कैंपस रिफॉर्म' वर्जीनिया स्थित रूढ़िवादी गैर-लाभकारी संस्था लीडरशिप इंस्टीट्यूट की एक परियोजना है।
इनपुट: IANS



