भारत की 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी': हिंद-प्रशांत में प्रशांत द्वीपीय देशों की भूमिका अहम - पबित्रा मार्गेरिटा
भारत प्रशांत क्षेत्र के द्वीपीय देशों के साथ अपने संबंधों को लगातार मज़बूत कर रहा है और उन्हें अपनी व्यापक हिंद-प्रशांत दृष्टि का एक अभिन्न अंग मानता है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह बात विदेश…
भारत प्रशांत क्षेत्र के द्वीपीय देशों के साथ अपने संबंधों को लगातार मज़बूत कर रहा है और उन्हें अपनी व्यापक हिंद-प्रशांत दृष्टि का एक अभिन्न अंग मानता है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह बात विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा ने मंगलवार को पलाऊ के कोरोर में आयोजित 55वें प्रशांत द्वीप समूह फोरम (PIF) के नेताओं की बैठक में कही।
डायलॉग पार्टनर सेशन को संबोधित करते हुए मार्गेरिटा ने कहा कि भारत की 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' के तहत प्रशांत देशों के साथ द्विपक्षीय संबंधों का विस्तार हुआ है। उन्होंने कहा, “भारत ‘ब्लू पैसिफिक कॉन्टिनेंट’ के साथ अपनी साझेदारी को सर्वोच्च महत्व देता है। हमारी एक्ट ईस्ट पॉलिसी के मार्गदर्शन में द्विपक्षीय संबंधों, फोरम फॉर इंडिया-पैसिफिक आइलैंड्स कोऑपरेशन (एफआईपीआईसी) और पैसिफिक आइलैंड्स फोरम के साथ हमारे जुड़ाव के माध्यम से इस साझेदारी को और गहराई मिली है।”
साझा मूल्य और दृष्टिकोण
मंत्री ने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत प्रशांत क्षेत्र को दूर-दराज का इलाका नहीं, बल्कि साझा हिंद-प्रशांत का हिस्सा मानता है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कथन को दोहराते हुए कहा, “भारत प्रशांत द्वीपीय देशों को बड़े महासागरीय राष्ट्रों के रूप में देखता है।” मार्गेरिटा ने कहा कि भारतीय दर्शन ‘पूरी दुनिया को एक परिवार’ मानने पर आधारित है, और यही भावना शिखर सम्मेलन की थीम ‘बी.ई.एल.ए.यू -बिल्डिंग इकोनॉमीज: लाइफ. एक्शन. यूनिटी’ में भी झलकती है। यह थीम भारत के स्वतंत्र, खुले और समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र के दृष्टिकोण के अनुरूप है, जो अंतरराष्ट्रीय कानून और संप्रभुता के सम्मान पर आधारित है।
ठोस पहल और सहयोग
भारत की हिंद-प्रशांत दृष्टि को साकार करने के लिए 2019 में ‘इंडो-पैसिफिक ओशंस इनिशिएटिव’ की घोषणा की गई थी। इसके अलावा, मार्गेरिटा ने 2023 में पापुआ न्यू गिनी में हुए तीसरे FIPIC शिखर सम्मेलन का जिक्र किया, जहाँ प्रधानमंत्री मोदी ने स्वास्थ्य, शिक्षा, डिजिटल क्षमता निर्माण और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में कई पहलों की घोषणा की थी। उन्होंने कहा कि नई दिल्ली इन पहलों को ज़मीनी स्तर पर लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है।
जलवायु परिवर्तन और आपदा राहत
प्रशांत देशों के लिए जलवायु परिवर्तन और समुद्र के बढ़ते जलस्तर को एक “मौजूदा और अस्तित्व से जुड़ी चिंता” बताते हुए मार्गेरिटा ने कहा कि भारत भी इस आकलन से सहमत है। उन्होंने बताया कि भारत अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA), आपदा प्रतिरोधी अवसंरचना गठबंधन (CDRI) और वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन (GBA) जैसी पहलों के माध्यम से इस चुनौती से निपटने में योगदान दे रहा है। इसके साथ ही, मानवीय सहायता और आपदा राहत (एचएडीआर) के क्षेत्र में भी भारत के प्रयास बढ़ रहे हैं, जिसमें समय पर चेतावनी प्रणाली और आपदा-रोधी बुनियादी ढाँचा शामिल है।
अंत में, उन्होंने ग्लोबल साउथ में प्रशांत क्षेत्र की आवाज़ को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि भारत वैश्विक मंचों पर उनकी चिंताओं को उचित स्थान दिलाने के लिए काम करता रहेगा।
इनपुट: IANS



