गुरूवार, 22 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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भारत-UK व्यापार: नए समझौते से बदलेगी तस्वीर, प्रोसेस्ड फूड और झींगा निर्यातकों को मिलेगा बड़ा बाज़ार

भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापारिक रिश्तों को ज़मीनी स्तर पर मज़बूत करने के लिए एक अहम समझौता हुआ है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, यह समझौता भारत की ट्रेड प्रमोशन काउंसिल ऑफ इंडिया (TPCI)…

भारत-UK व्यापार: नए समझौते से बदलेगी तस्वीर, प्रोसेस्ड फूड और झींगा निर्यातकों को मिलेगा बड़ा बाज़ार
(फोटो: IANS)

भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापारिक रिश्तों को ज़मीनी स्तर पर मज़बूत करने के लिए एक अहम समझौता हुआ है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, यह समझौता भारत की ट्रेड प्रमोशन काउंसिल ऑफ इंडिया (TPCI) और यूके-इंडिया बिजनेस काउंसिल (UKIBC) के बीच हुआ है, जिसका सीधा फ़ायदा छोटे और मझोले उद्यमों (SMEs) को मिलने की उम्मीद है। दोनों संस्थाओं ने एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसका लक्ष्य निवेश, व्यापार और कारोबारी सहयोग को बढ़ावा देना है।

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यह पहल भारत-ब्रिटेन के बीच लागू हुए व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (CETA) के बाद की गई है, ताकि मुक्त व्यापार के अवसरों को हक़ीक़त में बदला जा सके। इस साझेदारी के तहत कंपनियों को जोड़ने, व्यापार मिशन आयोजित करने और बाज़ार से जुड़ी जानकारी साझा करने पर ज़ोर दिया जाएगा।

समझौते के केंद्र में खाद्य और पेय पदार्थ

इस नए कारोबारी ढांचे में खाद्य और पेय पदार्थ (Food & Beverages) क्षेत्र को सबसे ज़्यादा संभावनाओं वाला माना जा रहा है। ब्रिटेन हर साल लगभग 50.68 अरब डॉलर का प्रोसेस्ड फूड आयात करता है, लेकिन इसमें भारत की हिस्सेदारी महज़ 0.6% (30.95 करोड़ डॉलर) है। CETA के लागू होने के बाद ब्रिटेन ने प्रोसेस्ड फूड पर लगने वाले 70% तक के शुल्क को खत्म कर दिया है, जिससे भारतीय निर्यातकों के लिए एक बड़ा बाज़ार खुल गया है।

इसी तरह, झींगा (श्रिम्प) पर लगने वाला 4.2 से 8.5 प्रतिशत का शुल्क और इंस्टेंट कॉफी पर लगने वाली ड्यूटी भी हटा दी गई है। उद्योग जगत का मानना है कि इससे भारतीय खाद्य निर्यातक ब्रिटेन में बसे 18.6 लाख भारतीय मूल के लोगों के पारंपरिक बाज़ार से आगे निकलकर वहाँ के बड़े खुदरा और खाद्य सेवा क्षेत्रों में भी अपनी जगह बना पाएंगे।

"नीति से आगे बढ़कर वास्तविक साझेदारी"

TPCI के अध्यक्ष मोहित सिंघला ने इस समझौते को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा, "यह समझौता भारत-यूके व्यापारिक संबंधों को नीति स्तर से आगे बढ़ाकर वास्तविक साझेदारी में बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।" उन्होंने ज़ोर दिया कि TPCI और UKIBC मिलकर काम करेंगे ताकि मुक्त व्यापार समझौते के अवसर ज़मीन पर दिखाई दें। सिंघला ने बताया, "अब भारतीय उत्पादों की 99 प्रतिशत टैरिफ लाइनों को ब्रिटेन में शुल्क-मुक्त पहुंच मिल रही है।"

इस समझौते के साथ ही TPCI ने लंदन में एक बिजनेस-टू-बिजनेस (B2B) कार्यक्रम भी आयोजित किया, जिसमें भारत की 48 निर्यातक कंपनियों और ब्रिटेन के 150 आयातकों ने हिस्सा लिया। TPCI के प्रतिनिधिमंडल ने ब्रिटेन के व्यापार विभाग, लंदन चैंबर ऑफ कॉमर्स और स्कॉच व्हिस्की एसोसिएशन के अधिकारियों से भी मुलाकात की। वित्त वर्ष 2025-26 तक दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 48 अरब पाउंड (लगभग 65 अरब डॉलर) तक पहुँच चुका है।

इनपुट: IANS

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