गुरूवार, 22 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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RBI के कड़े रुख से दिसंबर में फिर बढ़ सकती है रेपो दर, 50 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी का अनुमान

बढ़ती महंगाई और रुपये पर बने दबाव के चलते भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) दिसंबर में एक बार फिर रेपो दर में बढ़ोतरी कर सकता है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, अर्थशास्त्रियों का मानना है कि RBI…

RBI के कड़े रुख से दिसंबर में फिर बढ़ सकती है रेपो दर, 50 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी का अनुमान
(फोटो: IANS)

बढ़ती महंगाई और रुपये पर बने दबाव के चलते भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) दिसंबर में एक बार फिर रेपो दर में बढ़ोतरी कर सकता है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, अर्थशास्त्रियों का मानना है कि RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की अक्टूबर बैठक के मिनट्स से यह संकेत मिलता है कि केंद्रीय बैंक का रुख पहले से कहीं ज्यादा सख्त हो गया है, जिसके चलते लगातार दूसरी बार ब्याज दरों में वृद्धि की जा सकती है।

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विशेषज्ञों का अनुमान है कि दिसंबर में रेपो रेट में 50 बेसिस प्वाइंट (यानी 0.50%) तक की बढ़ोतरी संभव है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की एक रिपोर्ट में भी इस संभावना को बल दिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह बढ़ोतरी या तो सीधे रेपो रेट में 50 बेसिस प्वाइंट की वृद्धि के रूप में हो सकती है, या फिर इसे दो हिस्सों में बांटा जा सकता है, जिसमें 25 बेसिस प्वाइंट की सीधी बढ़ोतरी और 25 बेसिस प्वाइंट के बराबर नकदी समायोजन सुविधा (LAF) के दायरे को चौड़ा करना शामिल हो सकता है।

क्यों सख्त हुआ RBI का रुख?

डीबीएस बैंक की वरिष्ठ अर्थशास्त्री राधिका राव ने बताया कि अक्टूबर की बैठक के मिनट्स से साफ है कि समिति के सदस्यों ने ब्याज दरें बढ़ाने के लिए बढ़ती महंगाई और मजबूत आर्थिक वृद्धि को मुख्य कारण माना। कुछ सदस्यों ने महंगाई के जोखिम को देखते हुए पहले से सख्त कदम उठाने पर जोर दिया, जबकि अन्य सदस्य धीरे-धीरे बढ़ोतरी के पक्ष में थे।

SBI के समूह मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. सौम्य कांति घोष के अनुसार, महंगाई का दबाव अब व्यापक होता जा रहा है और रुपये में भी कमजोरी बनी हुई है। उन्होंने कहा, "हमें उम्मीद है कि नवंबर तक महंगाई दर 6.5 प्रतिशत से नीचे रह सकती है, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए RBI की सतर्क निगरानी जरूरी है।" RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने भी यह संकेत दिया है कि महंगाई अब ज्यादा व्यापक रूप ले रही है।

बाजार और रुपये पर असर

हालांकि, हाल में विदेशी मुद्रा बाजार से जुड़े कुछ नियामकीय उपायों और देश के सबसे बड़े इक्विटी आईपीओ में आए विदेशी निवेश के कारण रुपये को कुछ सहारा मिला है। इन कदमों की वजह से इस महीने डॉलर के मुकाबले रुपया करीब 1.5% मजबूत हुआ है। इसके बावजूद, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और वैश्विक जोखिम अभी भी एक बड़ी चुनौती बने हुए हैं, जिससे बॉन्ड बाजार पर दबाव बना रह सकता है। राधिका राव के अनुसार, अगर चालू कैलेंडर वर्ष की आखिरी तिमाही में महंगाई 6% के आसपास पहुंचती है, तो दिसंबर में एक और ब्याज दर बढ़ोतरी की संभावना बनी रहेगी।

इनपुट: IANS

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News4Social बिज़नेस डेस्क

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