भारत-UK व्यापार समझौता 15 जुलाई से होगा लागू, सरकार ने जारी किए अहम नियम
भारत और यूनाइटेड किंगडम (UK) के बीच हुए व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौते (CETA) को लागू करने की तारीख नज़दीक आ गई है। यह महत्वपूर्ण समझौता 15 जुलाई से प्रभावी हो जाएगा, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार
भारत और यूनाइटेड किंगडम (UK) के बीच हुए व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौते (CETA) को लागू करने की तारीख नज़दीक आ गई है। यह महत्वपूर्ण समझौता 15 जुलाई से प्रभावी हो जाएगा, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार ने इस समझौते से जुड़े ज़रूरी नियमों को अधिसूचित कर दिया है, ताकि इसका क्रियान्वयन सुचारू रूप से हो सके।
वित्त मंत्रालय के केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) द्वारा जारी ये नियम तय करते हैं कि कौन से उत्पाद शुल्क में छूट या अन्य लाभों के पात्र होंगे। ये नियम आयातकों और निर्यातकों के लिए शर्तों को भी स्पष्ट करते हैं, जो 15 जुलाई से ही लागू हो जाएंगे।
उत्पाद का मूल देश कैसे तय होगा?
जारी की गई अधिसूचना के मुताबिक, किसी भी उत्पाद को भारत या यूके में बना हुआ तभी माना जाएगा, जब वह कुछ खास शर्तों को पूरा करता हो। इसमें तीन मुख्य स्थितियाँ हैं:
- उत्पाद पूरी तरह से किसी एक देश (भारत या यूके) में बना हो।
- उत्पाद पूरी तरह से उसी देश में उपलब्ध सामग्री से बनाया गया हो।
- उत्पाद को बनाने में बाहरी इनपुट का इस्तेमाल हुआ हो, लेकिन वह समझौते में तय 'उत्पाद-विशिष्ट मूल' की शर्तों पर खरा उतरता हो।
हालांकि, सिर्फ़ साधारण रीपैकेजिंग, लेबल बदलना, धुलाई, छंटाई या पॉलिशिंग जैसे मामूली कामों से किसी उत्पाद को उस देश का 'मूल' दर्जा नहीं मिल जाएगा। कस्टम अधिकारियों को यह अधिकार होगा कि वे दावों की जांच करें और शर्तों का पालन न करने वाले उत्पादों को समझौते के तहत मिलने वाले लाभों से वंचित कर दें।
व्यापार और निवेश को मिलेगा बढ़ावा
वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने हाल ही में इस समझौते को दोनों देशों के लिए फायदेमंद बताया था। उन्होंने कहा, "भारत-यूके CETA से व्यापार, निवेश और इनोवेशन के क्षेत्रों में सहयोग और मजबूत होगा, जिससे दोनों देशों की साझा समृद्धि में योगदान मिलेगा।" लंदन में एक कार्यक्रम में उन्होंने भारतीय कंपनियों से आग्रह किया कि वे इस समझौते से मिलने वाले अवसरों का लाभ उठाकर यूके की कंपनियों के साथ अपनी भागीदारी बढ़ाएँ।
गोयल ने कहा कि यह समझौता द्विपक्षीय व्यापार, निवेश, टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप, इनोवेशन और सप्लाई चेन को मजबूत करने के बड़े मौके देता है। इसके अलावा, इससे प्रोफेशनल्स के लिए भी नए रास्ते खुलने की उम्मीद है।
इनपुट: IANS



