अगले 25 साल भारत के नाम: पीयूष गोयल ने कहा - दुनिया की सबसे तेज़ बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बने रहेंगे हम
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भारतीय अर्थव्यवस्था के भविष्य को लेकर एक बड़ा दृष्टिकोण सामने रखा है। उन्होंने कहा है कि भारत अगले दो से ढाई दशकों तक दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती…
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भारतीय अर्थव्यवस्था के भविष्य को लेकर एक बड़ा दृष्टिकोण सामने रखा है। उन्होंने कहा है कि भारत अगले दो से ढाई दशकों तक दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बना रहेगा। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, गोयल का मानना है कि आने वाले समय में वैश्विक विकास और तकनीकी प्रगति को दिशा देने में भारत की भूमिका बेहद अहम होगी।
गुरुवार को नई दिल्ली में एसआरसीसी शताब्दी सम्मेलन को संबोधित करते हुए पीयूष गोयल ने भारत की युवा और महत्वाकांक्षी आबादी को देश की सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा, "आज दुनिया भारत के साथ जुड़ना चाहती है, क्योंकि वह समझती है कि आकांक्षाओं से भरा युवा भारत वैश्विक विकास का नेतृत्व करने जा रहा है।" उनके मुताबिक, भारत आने वाले समय में प्रौद्योगिकी और वैश्विक व्यापार में प्रगति का एक प्रमुख इंजन बनने की क्षमता रखता है।
भारत के विकास की नींव क्या है?
मंत्री ने देश की दीर्घकालिक विकास संभावनाओं के पीछे के कारणों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत को अपनी जनसांख्यिकीय बढ़त (यानी बड़ी युवा आबादी), विशाल घरेलू उपभोक्ता बाजार और उद्यमशील ऊर्जा का भरपूर लाभ मिलेगा। इन्हीं वजहों से आने वाले दशकों तक देश की विकास गति को बनाए रखने में मदद मिलेगी।
गोयल ने अपने संबोधन में कहा, "हम अगले 20-25 वर्षों तक दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बने रहेंगे। हमारी जनसांख्यिकीय क्षमता, युवा आबादी और बड़े बाजार को देखते हुए हम यह तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे कि भविष्य की दुनिया किस दिशा में आगे बढ़ेगी।"
2047 तक 'विकसित राष्ट्र' का लक्ष्य
केंद्रीय मंत्री ने 2047 तक भारत को 'विकसित राष्ट्र' बनाने के लक्ष्य का भी जिक्र किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सपना केवल देशवासियों के सामूहिक प्रयासों से ही साकार हो सकता है। उन्होंने चुनौतियों से भागने की मानसिकता को छोड़कर राष्ट्र निर्माण की जिम्मेदारी स्वीकार करने का आह्वान किया।
गोयल ने कहा, "समाज का एक बड़ा वर्ग समस्याओं से बचने की कोशिश करता है। वे यह स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं कि हमारा भविष्य हमारे अपने हाथों में है। भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लिए हम सभी को योगदान देना होगा।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि बड़े लक्ष्य निर्धारित करना और उन्हें हासिल करने की महत्वाकांक्षा ही आधुनिक भारत की पहचान है, और इसी से दुनिया में देश की प्रतिष्ठा बढ़ रही है।
इनपुट: IANS



