गुरूवार, 15 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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निर्यात में बढ़ोतरी के बावजूद भारत का व्यापार घाटा सितंबर में बढ़कर 30 अरब डॉलर के पार

भारत के वस्तु व्यापार घाटे (Merchandise Trade Deficit) में एक बार फिर बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर महीने में यह 3.35 अरब डॉलर बढ़कर 30.21 अरब डॉलर पर पहुंच गया। यह स्थिति…

निर्यात में बढ़ोतरी के बावजूद भारत का व्यापार घाटा सितंबर में बढ़कर 30 अरब डॉलर के पार
(फोटो: IANS)

भारत के वस्तु व्यापार घाटे (Merchandise Trade Deficit) में एक बार फिर बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर महीने में यह 3.35 अरब डॉलर बढ़कर 30.21 अरब डॉलर पर पहुंच गया। यह स्थिति तब है जब देश के निर्यात में दोहरे अंकों की वृद्धि देखी गई है।

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समाचार एजेंसी IANS की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त में यह घाटा 26.86 अरब डॉलर था। व्यापार घाटा तब होता है जब कोई देश निर्यात की तुलना में आयात पर अधिक खर्च करता है। आंकड़ों से पता चलता है कि सितंबर में भारत का वस्तु निर्यात सालाना आधार पर 23.04% बढ़कर 44.4 अरब डॉलर हो गया, जो अगस्त के 43.81 अरब डॉलर से थोड़ा अधिक है।

आयात में तेज वृद्धि का असर

व्यापार घाटा बढ़ने की मुख्य वजह आयात में हुई बढ़ोतरी है। सितंबर में देश का आयात सालाना 8% बढ़कर 74.61 अरब डॉलर पर पहुंच गया। पिछले महीने, यानी अगस्त में, यह 70.67 अरब डॉलर था। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने इस पर कहा कि बढ़ते व्यापार घाटे के बावजूद भारत के निर्यात में वृद्धि का रुझान जारी है, जो निर्यात में निरंतर गति का संकेत देता है। उन्होंने यह भी बताया कि वित्त वर्ष 27 की दूसरी तिमाही में निर्यात की वृद्धि पहली तिमाही के मुकाबले अधिक रही है।

पिछले कुछ महीनों के आंकड़े

यह पहली बार नहीं है जब व्यापार घाटे में उतार-चढ़ाव देखा गया है। जुलाई में यह 32 अरब डॉलर के उच्च स्तर पर था, जिसके बाद अगस्त में घटकर 26.86 अरब डॉलर पर आ गया था। वहीं, एक साल पहले इसी अवधि (अगस्त 2025) में सोने का आयात 5.4 अरब डॉलर था, जो इस साल अगस्त में घटकर आधे से भी कम यानी 2.3 अरब डॉलर रह गया।

इसके अलावा, आरबीआई द्वारा पिछले महीने जारी आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में भारत का चालू खाता घाटा (CAD) 4.2 अरब डॉलर रहा। यह सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 0.5 प्रतिशत था, और यह आंकड़ा पश्चिमी एशिया संकट के कारण तेल, एलपीजी और उर्वरक की वैश्विक कीमतों में वृद्धि के बावजूद बना रहा।

इनपुट: IANS

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