RBI रिपोर्ट: वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार कायम, विदेशी निवेश भी बढ़ा
वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितता और आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) में रुकावटों के बावजूद, भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक बना हुआ है। समाचार एजेंसी IANS की…
वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितता और आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) में रुकावटों के बावजूद, भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक बना हुआ है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपने जुलाई बुलेटिन में कहा है कि मजबूत घरेलू मांग के दम पर देश की आर्थिक गतिविधियां जून तक तेज बनी रहीं।
RBI के मुताबिक, औद्योगिक और सेवा क्षेत्र के संकेतक भी मजबूत स्थिति में हैं, जो अर्थव्यवस्था के लचीलेपन को दर्शाता है। केंद्रीय बैंक का मानना है कि बाहरी चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना करने में भारत की यह आंतरिक मजबूती काम आ रही है।
विदेशी व्यापार और निवेश की स्थिति
RBI बुलेटिन में इस बात का जिक्र है कि देश के बाहरी क्षेत्र से जुड़े संकेतक भी स्थिर बने हुए हैं। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में निर्यात और आयात, दोनों में मजबूत वृद्धि दर्ज की गई। रिपोर्ट में उम्मीद जताई गई है कि भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (CETA) और अन्य द्विपक्षीय व्यापार समझौतों से विदेशी व्यापार की इस गति को और बढ़ावा मिलेगा।
विदेशी निवेश के मोर्चे पर भी सकारात्मक संकेत मिले हैं। हाल के महीनों में विदेशी निवेश में आई रिकवरी यह दिखाती है कि निवेशकों का भारतीय अर्थव्यवस्था पर भरोसा लौट रहा है। अप्रैल-मई 2026 के दौरान सकल और शुद्ध प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) पिछले साल की इसी अवधि से अधिक रहा। वहीं, जून और जुलाई में विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) का प्रवाह भी सकारात्मक बना रहा।
मुद्रास्फीति और कृषि क्षेत्र पर नजर
केंद्रीय बैंक ने बताया कि जून में खुदरा महंगाई में मामूली बढ़ोतरी हुई, लेकिन कीमती धातुओं को छोड़कर मुख्य मुद्रास्फीति निचले स्तर पर ही रही। वहीं, कृषि क्षेत्र में दक्षिण-पश्चिम मानसून का वितरण असमान रहा है, लेकिन RBI का मानना है कि देश में खाद्यान्न के पर्याप्त भंडार को देखते हुए खाद्य महंगाई पर इसका असर सीमित रहने की संभावना है।
RBI ने यह भी कहा कि मार्च 2026 के अंत तक भारत के प्रमुख बाहरी जोखिम संकेतक एक मजबूत और संतुलित स्थिति में थे, जो अर्थव्यवस्था की स्थिरता को रेखांकित करता है।
इनपुट: IANS



