भारतीय श्रम बाज़ार में सुधार के संकेत, अगस्त में बढ़ी कामगारों की भागीदारी
भारत के श्रम बाज़ार के लिए अगस्त का महीना सकारात्मक संकेत लेकर आया है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा जारी नवीनतम आँकड़ों के अनुसार, देश में काम करने या काम ढूँढ़ने वाले लोगों की संख्या…
भारत के श्रम बाज़ार के लिए अगस्त का महीना सकारात्मक संकेत लेकर आया है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा जारी नवीनतम आँकड़ों के अनुसार, देश में काम करने या काम ढूँढ़ने वाले लोगों की संख्या में बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो रोज़गार के अवसरों में सुधार की ओर इशारा करता है।
समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल अगस्त में कुल श्रम बल भागीदारी दर (LFPR) बढ़कर 55.6% हो गई। यह आँकड़ा न सिर्फ़ पिछले महीने, यानी जुलाई 2026 (55.4%) से बेहतर है, बल्कि पिछले साल अगस्त 2025 (55%) के मुकाबले भी एक महत्वपूर्ण सुधार दर्शाता है।
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों का हाल
आँकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि इस सुधार में ग्रामीण भारत का अहम योगदान रहा है। 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में LFPR अगस्त 2026 में 58.2% पर पहुँच गया, जो जुलाई 2026 के 58.0% से अधिक है। वहीं, शहरी क्षेत्रों में यह दर 50.4% पर स्थिर बनी रही।
इसी तरह, श्रमिक जनसंख्या अनुपात (WPR) — यानी काम करने वाले लोगों का कुल आबादी से अनुपात — भी अगस्त में बढ़कर 52.8% हो गया। यह इस साल मार्च के बाद का सबसे ऊँचा स्तर है। ग्रामीण WPR में सालाना आधार पर 1.3 प्रतिशत अंकों की वृद्धि हुई और यह 55.8% दर्ज किया गया।
श्रम बल में महिलाओं की बढ़ती भूमिका
एक और महत्वपूर्ण पहलू श्रम बल में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी है। कुल महिला LFPR अगस्त 2026 में 34.8% रहा, जो पिछले साल इसी महीने के मुकाबले 1.1 प्रतिशत अंक ज़्यादा है। इसमें मुख्य रूप से ग्रामीण महिलाओं का योगदान है, जिनकी भागीदारी दर जुलाई के 38.8% से बढ़कर अगस्त में 39.4% हो गई। शहरी महिलाओं की भागीदारी दर लगभग 25.4% पर स्थिर रही।
बेरोज़गारी दर स्थिर
इन सकारात्मक आँकड़ों के बीच, 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों के लिए समग्र बेरोज़गारी दर (UR) अगस्त में 5.0% पर स्थिर रही। हालाँकि, ग्रामीण क्षेत्रों में यह दर घटकर 4.1% पर आ गई, जो जनवरी 2026 के बाद का सबसे निचला स्तर है।
इनपुट: IANS



