नेपाल में बाढ़: भारत ने डॉक्टरों की टीम और 10 टन राहत सामग्री भेजी
बुधवार को नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद भारत ने मदद के लिए अपने प्रयास तेज कर दिए हैं। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इसी कड़ी में शुक्रवार को 10 टन से अधिक मानवीय सहायता और स्वास्थ्यकर्मियों की…
बुधवार को नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद भारत ने मदद के लिए अपने प्रयास तेज कर दिए हैं। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इसी कड़ी में शुक्रवार को 10 टन से अधिक मानवीय सहायता और स्वास्थ्यकर्मियों की एक टीम के साथ तीसरी विशेष उड़ान नई दिल्ली से काठमांडू के लिए रवाना हुई।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार को इस सहायता की पुष्टि की। भेजी गई राहत सामग्री में पोर्टेबल जनरेटर सेट, डिग्निटी किट, खाद्य पैकेट और पानी साफ करने वाली गोलियां शामिल हैं। इस उड़ान में डॉक्टरों और पैरामेडिकल कर्मियों की 11 सदस्यीय टीम के साथ-साथ सुरंग बचाव अभियान के लिए एक रेकी टीम भी भेजी गई है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारत, नेपाल में चल रहे राहत एवं बचाव कार्यों में अपना सहयोग जारी रखेगा।
बचाए गए भारतीय नागरिक
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को नई दिल्ली में एक प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि अब तक कुल 84 भारतीय नागरिकों को बचाया जा चुका है। इनमें त्रिशुली-1 जलविद्युत परियोजना में काम कर रहे 63 भारतीय भी शामिल हैं। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि चीन की सीमा में फंसे 96 अन्य भारतीय नागरिक सड़क मार्ग से सुरक्षित नेपाल पहुंच गए हैं।
इससे पहले, विदेश मंत्री जयशंकर ने काठमांडू से बचाकर दिल्ली लाए गए तमिलनाडु के 21 तीर्थयात्रियों से मुलाकात की। ये तीर्थयात्री कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए विभिन्न समूहों का हिस्सा थे। जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, “मैंने तमिलनाडु के 21 पर्यटकों के एक समूह का स्वागत किया, जिन्हें नेपाल में आई बाढ़ से बचाया गया था। उनकी आपबीती सुनकर मैं अत्यंत भावुक हो गया।” उन्होंने बचाव अभियान के लिए नेपाली सेना और सरकार का आभार जताया और भारतीय दूतावास के प्रयासों की भी सराहना की।
राहत कार्यों में भारत का सहयोग
भारत लगातार नेपाल को सहायता भेज रहा है, जिसमें बचाव कार्यों में मदद के लिए बेली ब्रिज की तैनाती भी शामिल है। नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय ने एक नियंत्रण कक्ष भी स्थापित किया है जो चौबीसों घंटे काम कर रहा है। मंत्रालय के अधिकारी उन राज्य सरकारों के साथ भी संपर्क में हैं, जहां से लोग कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए गए थे।
इनपुट: IANS



