RBI की डॉलर जुटाने की स्कीम में छोटे-बड़े बैंकों का जलवा, ICICI, RBL और HSBC सबसे आगे
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की एक विशेष स्कीम के ज़रिए देश में डॉलर लाने की कोशिशों को ज़बरदस्त सफलता मिली है। इस स्कीम के तहत कुल 127.22 अरब डॉलर का निवेश आया है। समाचार एजेंसी IANS के हवाले से मिली…
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की एक विशेष स्कीम के ज़रिए देश में डॉलर लाने की कोशिशों को ज़बरदस्त सफलता मिली है। इस स्कीम के तहत कुल 127.22 अरब डॉलर का निवेश आया है। समाचार एजेंसी IANS के हवाले से मिली ब्रोकरेज रिपोर्ट्स के मुताबिक, कई बैंकों ने अपने सामान्य आकार से कहीं बेहतर प्रदर्शन करते हुए इस निवेश को आकर्षित करने में अहम भूमिका निभाई।
इस विदेशी मुद्रा अनिवासी (बैंक) यानी FCNR(B) जमा योजना के तहत बैंकों ने निवेशकों को लुभाने के लिए आकर्षक ब्याज दरें पेश कीं। इसका नतीजा यह हुआ कि कुछ बैंकों ने अपनी सामान्य बाज़ार हिस्सेदारी से कई गुना ज़्यादा फंड जुटा लिया।
निजी बैंकों में ICICI अव्वल
निजी क्षेत्र के बैंकों में आईसीआईसीआई बैंक सबसे आगे रहा। मैक्वेरी की एक रिपोर्ट के अनुसार, बैंक ने अकेले 17.88 अरब डॉलर (करीब 1.70 लाख करोड़ रुपए) की FCNR(B) जमा राशि आकर्षित की। इस फंड का 70% से ज़्यादा हिस्सा बैंक ने अपनी ही बैलेंस शीट से जुटाया, जिसमें अंतरराष्ट्रीय शाखाओं से लिया गया 9 अरब डॉलर का लोन और अन्य बैंकों को जारी किए गए 3.6 अरब डॉलर के स्टैंडबाय लेटर ऑफ क्रेडिट शामिल हैं। एक अन्य अनुमान के मुताबिक, आईसीआईसीआई बैंक की कुल जमा में हिस्सेदारी लगभग 14% रही, जो उसकी सामान्य डिपॉजिट बाज़ार हिस्सेदारी से दोगुनी है।
छोटे बैंक RBL ने किया बड़ा कमाल
एक छोटे निजी बैंक, आरबीएल बैंक, ने भी अपनी क्षमता से कहीं बढ़कर प्रदर्शन किया। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज (एमओएसएल) के अनुसार, बैंक ने लगभग 3.4 अरब डॉलर (करीब 32,000 करोड़ रुपए) की राशि जुटाई। यह कुल FCNR(B) जमा का लगभग 2.7% हिस्सा था, जबकि सामान्य डिपॉजिट बाज़ार में बैंक की हिस्सेदारी महज़ 0.5% है।
विदेशी बैंकों को सबसे ज़्यादा फायदा
इस स्कीम का सबसे बड़ा लाभ विदेशी बैंकों को मिलता दिखा। जेफरीज की रिपोर्ट बताती है कि जून की शुरुआत में FCNR(B) जमा में इन बैंकों की हिस्सेदारी सिर्फ़ 1-2% थी, जो जुलाई के अंत तक बढ़कर नए डिपॉजिट का 15 से 30 प्रतिशत हो गई।
खास तौर पर एचएसबीसी बैंक ने शानदार प्रदर्शन किया। 30 जुलाई तक उसने कुल नए डिपॉजिट का लगभग 22% हिस्सा हासिल करते हुए 6.1 अरब डॉलर (करीब 58,000 करोड़ रुपए) जुटाए। अगस्त के अंत तक यह आंकड़ा 6.14 अरब डॉलर तक पहुंच गया था। एक अन्य विदेशी बैंक, स्टैंडर्ड चार्टर्ड ने भी नए डिपॉजिट का लगभग 7% हिस्सा अपनी ओर आकर्षित किया।
इनपुट: IANS



