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भारतीय कृषि में नई क्रांति: जलवायु-अनुकूल फसलों से लेकर अफ्रीकन स्वाइन फीवर के पहले स्वदेशी टीके तक, ICAR की नई पेशकश

भारत के कृषि क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार को गति देते हुए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने पिछले एक साल में 44 फसलों की 386 नई और बेहतर किस्में विकसित की हैं। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इन कि

भारतीय कृषि में नई क्रांति: जलवायु-अनुकूल फसलों से लेकर अफ्रीकन स्वाइन फीवर के पहले स्वदेशी टीके तक, ICAR की नई पेशकश
(फोटो: IANS)

भारत के कृषि क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार को गति देते हुए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने पिछले एक साल में 44 फसलों की 386 नई और बेहतर किस्में विकसित की हैं। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इन किस्मों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इनमें से 94 प्रतिशत किस्में जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम हैं।

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गुरुवार को ICAR के 98वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इन उपलब्धियों की जानकारी दी। उन्होंने इस मौके पर 43 नई उन्नत फसल किस्मों, 17 कृषि तकनीकों और 14 प्रकाशनों का विमोचन भी किया। चौहान ने ICAR को भारत के कृषि क्षेत्र में बदलाव लाने वाला एक प्रमुख संस्थान बताते हुए कहा कि वैज्ञानिकों के शोध ने देश को अनाज, बागवानी, दूध और मछली उत्पादन में रिकॉर्ड ऊंचाइयों पर पहुंचाया है।

किसानों और पशुपालकों के लिए क्या है खास?

इस साल जारी की गई नई तकनीकों में कई महत्वपूर्ण नवाचार शामिल हैं, जो सीधे तौर पर किसानों और पशुपालकों की मदद करेंगे। इनमें बासमती चावल की उन्नत किस्में, खारी और क्षारीय मिट्टी में भी उगने वाली चावल की किस्में, और आम के निर्यात के लिए एक नई उत्पादन तकनीक प्रमुख है। पशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए भारत का पहला स्वदेशी अफ्रीकन स्वाइन फीवर टीका और एक डिजिटल स्वाइन डिजीज एटलस भी जारी किया गया। इसके अलावा, छोटे किसानों की लागत कम करने के लिए एक कम खर्चीला कसावा हार्वेस्टर भी पेश किया गया है।

शोध से खेत तक का सफर होगा तेज

प्रयोगशाला में विकसित तकनीकें किसानों तक तेजी से पहुंचें, यह सुनिश्चित करने के लिए ICAR ने 51 उद्योग भागीदारों के साथ 72 समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इसका उद्देश्य तकनीक के व्यावसायीकरण और 'लास्ट-माइल डिलीवरी' को गति देना है। इस अवसर पर केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह ने भी कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) के नेटवर्क के माध्यम से शोध को किसानों, पशुपालकों और मछुआरों तक पहुंचाने पर जोर दिया।

कार्यक्रम में कृषि अनुसंधान और शिक्षा विभाग के सचिव तथा ICAR के महानिदेशक एम.एल. जाट ने परिषद की उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं की रूपरेखा प्रस्तुत की। चौहान ने अपने संबोधन में दालों और तिलहन में आत्मनिर्भरता, बेहतर कृषि शिक्षा और नवाचारों को व्यापक स्तर पर फैलाने की आवश्यकता पर बल दिया। इस मौके पर 150 अस्थायी दैनिक मजदूरों की सेवाओं को नियमित करते हुए उन्हें नियुक्ति पत्र भी दिए गए।

इनपुट: IANS

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