मंगलवार, 21 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
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ऑस्ट्रेलियाई आसमान में गरजेंगे भारतीय राफेल, बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास 'पिच ब्लैक' में IAF की भागीदारी

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच रक्षा संबंधों को नई ऊंचाई देते हुए भारतीय वायु सेना (IAF) का एक दल बहुराष्ट्रीय हवाई युद्धाभ्यास 'पिच ब्लैक 2026' में हिस्सा लेने के लिए ऑस्ट्रेलिया पहुँच गया है। समाचार…

ऑस्ट्रेलियाई आसमान में गरजेंगे भारतीय राफेल, बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास 'पिच ब्लैक' में IAF की भागीदारी
(फोटो: IANS)

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच रक्षा संबंधों को नई ऊंचाई देते हुए भारतीय वायु सेना (IAF) का एक दल बहुराष्ट्रीय हवाई युद्धाभ्यास 'पिच ब्लैक 2026' में हिस्सा लेने के लिए ऑस्ट्रेलिया पहुँच गया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस अभ्यास के दौरान भारत के चार राफेल लड़ाकू विमान ऑस्ट्रेलियाई आसमान में अपनी युद्धक क्षमता का प्रदर्शन करेंगे। यह दक्षिणी गोलार्ध में होने वाले सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय हवाई युद्धाभ्यासों में से एक माना जाता है।

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डार्विन में हुए अभ्यास के उद्घाटन समारोह के दौरान भारतीय वायु सेना की टुकड़ी ने ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज से भी मुलाकात की। इस मुलाकात की जानकारी ऑस्ट्रेलिया में भारतीय उच्चायोग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा करते हुए कहा, "समुद्र तल से आसमान तक, भारत ऑस्ट्रेलिया रक्षा संबंध शान से आसमान छूने के लिए तैयार हैं!"

क्या है एक्सरसाइज पिच ब्लैक?

रॉयल ऑस्ट्रेलियन एयर फ़ोर्स (RAAF) द्वारा हर दो साल में आयोजित होने वाला यह एक प्रतिष्ठित बहुराष्ट्रीय हवाई युद्ध अभ्यास है। रक्षा मंत्रालय के एक बयान के मुताबिक, 20 जुलाई से 7 अगस्त 2026 तक चलने वाले इस अभ्यास का नाम उत्तरी ऑस्ट्रेलिया के विशाल और कम आबादी वाले क्षेत्रों में रात में उड़ान भरने पर जोर देने के कारण पड़ा है।

इस वर्ष यह अभ्यास अपने 45 साल के इतिहास में सबसे बड़े पैमाने पर आयोजित हो रहा है, जिसमें भारत समेत कुल 20 देशों के प्रतिभागी शामिल हो रहे हैं। इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य भाग लेने वाली वायु सेनाओं के बीच आपसी तालमेल (interoperability) बढ़ाना और एक साथ मिलकर काम करने की क्षमता को मजबूत करना है।

अभ्यास में भारत की भूमिका

इस युद्धाभ्यास के लिए भारत से लगभग 100 वायु सैनिकों का एक दल ऑस्ट्रेलिया गया है, जिसमें पायलट, इंजीनियर, तकनीशियन और अन्य विशेषज्ञ शामिल हैं। भारतीय दल चार राफेल मल्टीरोल लड़ाकू विमानों का संचालन करेगा। इन विमानों को कॉम्बैट सपोर्ट देने के लिए सी-17 ग्लोबमास्टर-III और हवा में ईंधन भरने वाले आईएल-78 विमान भी दल का हिस्सा हैं।

रक्षा मंत्रालय ने कहा कि यह अभ्यास हिंद-प्रशांत क्षेत्र में पेशेवर साझेदारी को मजबूत करने और लंबी दूरी के हवाई अभियानों को प्रमाणित करने का एक शानदार अवसर प्रदान करता है। इससे पहले भारतीय वायु सेना ने 2018, 2022 और 2024 के संस्करणों में भी भाग लिया था, जो क्षेत्रीय सुरक्षा और रक्षा सहयोग के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

इनपुट: IANS

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