काजू घोटाला: वरिष्ठ नौकरशाह की नियुक्ति पर केरल हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से किए कड़े सवाल
केरल हाई कोर्ट ने राज्य सरकार की इस बात के लिए कड़ी आलोचना की है कि उसने एक वरिष्ठ नौकरशाह को कई अहम सरकारी पदों पर नियुक्त कर रखा है, जबकि वह कथित 600 करोड़ रुपए के काजू विकास निगम घोटाले में मुकदमे…
केरल हाई कोर्ट ने राज्य सरकार की इस बात के लिए कड़ी आलोचना की है कि उसने एक वरिष्ठ नौकरशाह को कई अहम सरकारी पदों पर नियुक्त कर रखा है, जबकि वह कथित 600 करोड़ रुपए के काजू विकास निगम घोटाले में मुकदमे का सामना कर रहा है। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, अदालत ने सवाल उठाया कि भ्रष्टाचार के इतने गंभीर मामले में आरोपी अधिकारी को महत्वपूर्ण संस्थानों की जिम्मेदारी कैसे दी जा सकती है।
यह मामला डॉ. केए रतीश से जुड़ा है, जो सीबीआई द्वारा दर्ज किए गए काजू आयात घोटाले में मुख्य आरोपी हैं। सामाजिक कार्यकर्ता केएम शाहजहां द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने सरकार के इस फैसले पर गंभीर चिंता व्यक्त की।
अदालत की सख्त टिप्पणियाँ
जस्टिस ए. बदहर की बेंच ने मौखिक रूप से टिप्पणी करते हुए पूछा, "क्या सरकार ने भ्रष्टाचार के इतने बड़े आरोपी को तीन महत्वपूर्ण संस्थानों का प्रमुख नियुक्त किया है?" अदालत ने यह भी कहा कि जिन पदों पर रतीश की नियुक्ति हुई है, उनमें भ्रष्टाचार की काफी गुंजाइश है। पीठ ने रतीश पर लगे आरोपों को गंभीर बताते हुए सरकार को चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
अदालत ने इस बात पर स्पष्टीकरण मांगा है कि जब अधिकारी के खिलाफ आपराधिक मुकदमा लंबित है, तो ऐसी नियुक्तियां किस आधार पर की गईं। याचिका में यह भी बताया गया है कि सीबीआई मामले में मुकदमा चलाने की मंजूरी मिलने के बावजूद रतीश अपने पदों पर बने हुए हैं।
आरोपी अधिकारी और उनकी नियुक्तियां
डॉ. केए रतीश वर्तमान में केरल खादी बोर्ड के सेक्रेटरी, केरल स्टेट रुड्रोनिक्स के मैनेजिंग डायरेक्टर और केरल खादी वर्कर्स वेलफेयर फंड बोर्ड के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर के तौर पर कार्यरत हैं। उन पर ये आरोप केरल राज्य काजू विकास निगम के मैनेजिंग डायरेक्टर के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान काजू आयात में हुई कथित अनियमितताओं से संबंधित हैं।
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि उन्होंने आवश्यक सतर्कता मंजूरी के बिना 11 वर्षों से अधिक समय तक सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में प्रबंध निदेशक के रूप में काम किया, जो कंपनी अधिनियम के नियमों का उल्लंघन है। अदालत की इन सख्त टिप्पणियों के बाद रतीश की नियुक्तियों पर सरकार के रुख की अब गहन न्यायिक समीक्षा की जाएगी।
इनपुट: IANS



