यमन: हूतियों की नई चेतावनी, सऊदी बंदरगाहों से व्यापार करने वाले जहाज भी होंगे निशाना
यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के खिलाफ अपनी समुद्री नाकेबंदी की घोषणा के बाद अब अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों को भी सीधी चेतावनी जारी की है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, हूतियों…
यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के खिलाफ अपनी समुद्री नाकेबंदी की घोषणा के बाद अब अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों को भी सीधी चेतावनी जारी की है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, हूतियों ने कहा है कि जो भी जहाज सऊदी अरब के बंदरगाहों से माल लादने या उतारने का काम करेगा, वह उनके सैन्य हमले का निशाना बन सकता है। यह चेतावनी सिर्फ सऊदी झंडे वाले जहाजों तक ही सीमित नहीं है।
यह धमकी यमन की राजधानी सना में स्थित हूती समूह के 'ह्यूमैनिटेरियन ऑपरेशंस कोऑर्डिनेशन सेंटर' द्वारा भेजे गए एक ईमेल के जरिए दी गई है। इटली की समाचार एजेंसी एडनक्रोनोस के मुताबिक, इस ईमेल में शिपिंग कंपनियों से सऊदी बंदरगाहों से जुड़े किसी भी सफर की योजना बनाते समय अत्यधिक सावधानी बरतने को कहा गया है। ईमेल में स्पष्ट किया गया है कि ऐसे कारोबारी गतिविधियों में शामिल जहाज हूतियों की मारक क्षमता के दायरे में आने पर हमले का जोखिम उठाएंगे।
क्यों बढ़ा है यह नया तनाव?
यह घटनाक्रम हूतियों और सऊदी अरब के बीच हाल ही में बढ़े तनाव का नतीजा है। इसकी एक बड़ी वजह 13 जुलाई को सना अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुआ हमला बताया जा रहा है। सऊदी समर्थित यमनी सरकार ने हवाई अड्डे के रनवे पर हमला किया था, ताकि ईरान से लौट रहा हूती नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल का विमान वहां उतर न सके। यह प्रतिनिधिमंडल ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के निधन पर आयोजित अंतिम संस्कार से वापस आ रहा था। हूतियों ने इस हमले के लिए सऊदी अरब को जिम्मेदार ठहराते हुए मिसाइलों और ड्रोन से जवाबी कार्रवाई की थी।
व्यापार मार्गों पर बढ़ता खतरा
हूतियों की इस नई घोषणा के बाद किसी कारोबारी जहाज पर हमले की कोई खबर तो नहीं आई है, लेकिन इससे क्षेत्र में समुद्री व्यापार की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। कुवैत और कतर जैसे क्षेत्रीय देशों ने हूतियों के इस कदम को खारिज करते हुए अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत समुद्री आवाजाही की स्वतंत्रता का समर्थन किया है। गौरतलब है कि यमन 2014 के अंत से ही गृहयुद्ध की चपेट में है, जब हूतियों ने सना समेत देश के बड़े उत्तरी हिस्से पर कब्जा कर लिया था। इसके जवाब में 2015 में सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने यमनी सरकार के समर्थन में सैन्य हस्तक्षेप किया था।
इनपुट: IANS



