सतना और रीवा में भारी बारिश से उफनीं नदियां, 36 गांवों में बाढ़ का अलर्ट जारी
मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश ने सतना और रीवा जिलों के कई हिस्सों में बाढ़ जैसे हालात पैदा कर दिए हैं। सोमवार रात से जारी मूसलाधार बारिश के कारण मंदाकिनी और सिमरावल समेत कई…
मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश ने सतना और रीवा जिलों के कई हिस्सों में बाढ़ जैसे हालात पैदा कर दिए हैं। सोमवार रात से जारी मूसलाधार बारिश के कारण मंदाकिनी और सिमरावल समेत कई नदियां और नाले उफान पर हैं, जिससे जन-जीवन प्रभावित हुआ है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सतना की दो तहसीलों के 36 गांवों में अलर्ट जारी किया है।
सतना जिले में स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक है, जहां सिमरावल नदी के किनारे बसे रामपुर बघेलन और कोटार तहसीलों के 36 गांवों को खाली करने की सलाह दी गई है। जिला कलेक्टर सतीश कुमार ने बताया कि प्रशासन पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए है और राहत एवं बचाव दलों को किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने को कहा गया है। उन्होंने कहा, "संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।"
नदी-नाले उफान पर, सड़क संपर्क टूटा
बारिश के कारण चित्रकूट में मंदाकिनी नदी खतरे के निशान से लगभग दो मीटर ऊपर बह रही है। जलस्तर बढ़ने से कई इलाकों में सड़क संपर्क भी टूट गया है। मझगवां जनपद में देंगरहाट-खोदरी सड़क पर बना एक पुल ढह गया, जिससे यातायात पूरी तरह बंद हो गया है। इसके अलावा, मझगवां-पहाड़ीखेड़ा संपर्क मार्ग भी बाधित है और पालदेव ग्राम पंचायत में कई घर और सड़कें पानी में डूब गई हैं।
रीवा जिले में भी प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। यहां तामस नदी पर बने बांध के गेट पानी के बढ़ते प्रवाह को देखते हुए खोल दिए गए हैं। सभी उपमंडल मजिस्ट्रेटों को अपने-अपने इलाकों में निगरानी रखने और लोगों को उफनती नदियों व नालों से दूर रहने की सलाह देने के निर्देश दिए गए हैं।
मौसम विभाग की चेतावनी
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने आने वाले दिनों में भी बारिश जारी रहने की संभावना जताई है। विभाग ने उमरिया और बालाघाट में बहुत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इसके अलावा, सतना, रीवा, पन्ना, सीधी, सिंगरौली समेत कई अन्य जिलों में भी भारी बारिश की भविष्यवाणी की गई है। मौसम विभाग के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव के क्षेत्र के कारण यह मौसमी प्रणाली 4 सितंबर तक सक्रिय रह सकती है।
इनपुट: IANS



