पश्चिम बंगाल: शिक्षकों की जनगणना ड्यूटी पर कलकत्ता हाई कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा
पश्चिम बंगाल में सरकारी स्कूल के शिक्षकों को जनगणना के काम में लगाए जाने के फैसले पर कलकत्ता हाई कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। जस्टिस कृष्णा राव की एकल-न्यायाधीश पीठ ने बुधवार को इस मामले…
पश्चिम बंगाल में सरकारी स्कूल के शिक्षकों को जनगणना के काम में लगाए जाने के फैसले पर कलकत्ता हाई कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। जस्टिस कृष्णा राव की एकल-न्यायाधीश पीठ ने बुधवार को इस मामले में दायर याचिका पर सुनवाई पूरी की। इस दौरान अदालत ने शिक्षकों को एक ही समय में पढ़ाने और जनगणना, दोनों जिम्मेदारियाँ सौंपने के तर्क पर गंभीर सवाल उठाए।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, सुनवाई के दौरान जस्टिस राव ने टिप्पणी की कि शिक्षकों का मुख्य काम पढ़ाना है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों से या तो पढ़ाने का काम लिया जाना चाहिए या फिर जनगणना का। इससे पहले भी अदालत ने जनगणना के लिए एक साथ बड़ी संख्या में शिक्षकों की ड्यूटी लगाने पर सवाल उठाया था और पूछा था कि क्या केंद्र सरकार ने यह फैसला लेने से पहले राज्य सरकार से सलाह ली थी।
सरकार का बदला हुआ रुख
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि वह अपने 3 अगस्त के उस नोटिफिकेशन को वापस ले रही है, जिसमें शिक्षकों से स्कूल के समय के बाद जनगणना का काम करने को कहा गया था। सरकार के नए नोटिफिकेशन के मुताबिक, शिक्षक अब केवल 'ऑन ड्यूटी' यानी अपने काम के घंटों के दौरान ही जनगणना का काम कर सकते हैं। हालांकि, इसी बदलाव को लेकर शिक्षक संगठनों ने चिंता जताई है।
शिक्षक संघों और शिक्षा विभाग की चिंता
विभिन्न शिक्षक संगठनों का दावा है कि अगर शिक्षकों को उनके काम के समय में जनगणना में लगाया जाता है, तो स्कूलों में पढ़ाई-लिखाई बुरी तरह प्रभावित होगी, खासकर उन स्कूलों में जहाँ पहले से ही शिक्षकों की कमी है। इसी बीच, पश्चिम बंगाल स्कूल शिक्षा विभाग ने भी राज्य के गृह विभाग से यह सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है कि शिक्षकों की जनगणना ड्यूटी के बावजूद छात्रों के हितों की रक्षा की जाए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि 'एलिमेंट्री एजुकेशन में डिप्लोमा' (DElEd) कर रहे प्रशिक्षुओं को जनगणना के काम से छूट दी जानी चाहिए।
इनपुट: IANS



