सोमवार, 6 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
गुजरात

गुजरात: सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण के लिए दक्षिण कोरियाई तकनीक से बन रहे हैं दो रबर डैम

गुजरात में पानी की सप्लाई और बाढ़ प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए एक नई तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। राज्य सरकार छोटा उदयपुर और तापी जिलों में दक्षिण कोरिया की 'एयर-फिल्ड रबर ब्लैडर टेक्नोलॉजी' का

गुजरात: सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण के लिए दक्षिण कोरियाई तकनीक से बन रहे हैं दो रबर डैम
(फोटो: IANS)

गुजरात में पानी की सप्लाई और बाढ़ प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए एक नई तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। राज्य सरकार छोटा उदयपुर और तापी जिलों में दक्षिण कोरिया की 'एयर-फिल्ड रबर ब्लैडर टेक्नोलॉजी' का उपयोग करके अपने पहले दो रबर डैम बना रही है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इन परियोजनाओं पर कुल 162 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया गया है और इनसे सिंचाई, भूजल स्तर सुधारने तथा बाढ़ नियंत्रण में मदद मिलने की उम्मीद है।

विज्ञापन

यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'कैच द रेन' अभियान का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य दूर-दराज के इलाकों में पानी के बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है। आइए इन दोनों परियोजनाओं को विस्तार से जानते हैं।

छोटा उदयपुर का राजवासना रबर डैम

छोटा उदयपुर जिले के बोदेली तालुका में हेरन नदी पर बन रहे राजवासना रबर डैम की अनुमानित लागत 82.97 करोड़ रुपये है। इस डैम में 180 मीटर लंबा और 3.5 मीटर ऊंचा रबर ब्लैडर लगाया जाएगा, जिसमें हवा भरी जा सकेगी। अधिकारियों के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट का लगभग 75% काम पूरा हो चुका है और इसे सितंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है।

इस तकनीक से मौजूदा वियर की जल भंडारण क्षमता बढ़कर 3.5 मिलियन क्यूबिक मीटर (MCM) हो जाएगी। इससे 25 गांवों के किसानों को सीधे फायदा मिलेगा और 3,420 हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई हो सकेगी। एक अधिकारी ने बताया, "भारी बारिश के दौरान, इस हवा भरने योग्य ढांचे की हवा निकालकर उसे नीचे किया जा सकेगा, जिससे बाढ़ का पानी आसानी से निकल सके और आस-पास के गांवों में बाढ़ का खतरा कम हो सके।" इस प्रोजेक्ट में 10 साल का ऑपरेशन और मेंटेनेंस भी शामिल है।

तापी का पाठकवाड़ी रबर डैम

दूसरा डैम तापी जिले के डोलवन तालुका में अंबिका नदी पर बन रहा है, जिसकी अनुमानित लागत 79.13 करोड़ रुपये है। जापानी डिजाइन पर आधारित इस पाठकवाड़ी रबर डैम का 90% निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। इसका मुख्य उद्देश्य लगभग 650 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराना है, जिससे पाठकवाड़ी, ढोडियावाड, उनाई और सिंधाई गांवों के किसानों को खरीफ और गर्मी की फसलों के लिए पानी मिलेगा।

अधिकारियों ने बताया कि इलाके की समतल जमीन और नदी के निचले किनारों को देखते हुए पारंपरिक ऊंचे चेक डैम उपयुक्त नहीं थे, इसलिए स्थानीय किसान नेताओं और व्यारा के विधायक मोहन कोकानी के सुझाव पर इस तकनीक को चुना गया। यह डैम जापानी कोड 2000 मानकों के अनुसार बनाया गया है और इसकी अनुमानित आयु लगभग 30 वर्ष है। इस तकनीक का इस्तेमाल भविष्य में मीठे पानी में समुद्री पानी के प्रवेश को रोकने के लिए भी किया जा सकता है।

इनपुट: IANS

N

News4Social वायर डेस्क

News4Social वायर डेस्क, समाचार एजेंसी IANS से लाइसेंस-प्राप्त खबरें प्रकाशित करता है। इन रिपोर्ट्स की मूल जानकारी एजेंसी से आती है, जिसे हमारी संपादकीय टीम तथ्यों की जाँच के बाद News4Social की स्पष्ट व सहज भाषा-शैली में संपादित एवं पुनर्लिखित करती है — ताकि पाठकों को भरोसेमंद और पठनीय समाचार मिलें। प्रत्येक रिपोर्ट में मूल स्रोत IANS का श्रेय दिया जाता है; तस्वीरें: IANS। सभी लेख देखें →

आगे पढ़ें

और देखें →