गुजरात में चांदीपुरा वायरस का बढ़ता प्रकोप: 225 संदिग्ध मामले, 25 बच्चों की मौत की पुष्टि
गुजरात में चांदीपुरा वायरस का खतरा लगातार बना हुआ है। 30 जून से अब तक राज्य में इस वायरस के 225 संदिग्ध मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें से 39 मामलों की लैब जांच में पुष्टि हुई है। समाचार एजेंसी IANS…
गुजरात में चांदीपुरा वायरस का खतरा लगातार बना हुआ है। 30 जून से अब तक राज्य में इस वायरस के 225 संदिग्ध मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें से 39 मामलों की लैब जांच में पुष्टि हुई है। समाचार एजेंसी IANS द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, पुष्टि किए गए इन मामलों में से 25 मरीजों की मौत हो चुकी है। यह आंकड़े स्वास्थ्य विभाग ने सोमवार, 10 अगस्त तक की स्थिति के आधार पर जारी किए हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस महीने की शुरुआत में संदिग्ध मामलों की संख्या 184 थी, जो अब 41 बढ़कर 225 तक पहुंच गई है। हालांकि, लैब से पुष्टि हुए मामलों की संख्या 39 पर स्थिर है। वहीं, वायरस से मरने वालों का आंकड़ा 22 से बढ़कर 25 हो गया है। स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि 225 संदिग्ध मामलों में से 212 की जांच पूरी हो चुकी है और 13 सैंपल की रिपोर्ट का अभी इंतजार है। इन रिपोर्ट्स के आने के बाद पुष्टि वाले मामलों की संख्या में बदलाव हो सकता है।
राज्य में कैसे फैला संक्रमण?
इस बीमारी का पहला मामला जुलाई की शुरुआत में पंचमहल जिले में सामने आया था, जहां चांदीपुरा संक्रमण जैसे लक्षणों के बाद दो छोटे बच्चों की जान चली गई थी। इन दुखद घटनाओं के बाद, प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी, टेस्टिंग और वेक्टर-कंट्रोल (बीमारी फैलाने वाले कीटों पर नियंत्रण) के उपाय तेज कर दिए। इसके बावजूद संक्रमण राज्य के अन्य हिस्सों में भी फैल गया।
पहले की रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया था कि पुष्टि हुए सभी मरीज 15 साल से कम उम्र के थे और मामले किसी एक गांव या जिले तक सीमित न होकर गुजरात के अलग-अलग हिस्सों से थे।
क्या है चांदीपुरा वायरस और सरकार के कदम
चांदीपुरा एक वेक्टर-जनित वायरस है जो मुख्य रूप से सैंडफ्लाई (एक प्रकार की मक्खी) के काटने से फैलता है। मानसून के मौसम में इसके मामले बढ़ने की आशंका रहती है। यह वायरस खास तौर पर बच्चों में एक्यूट एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम (मस्तिष्क में गंभीर सूजन) पैदा कर सकता है, जो जानलेवा साबित हो सकता है।
स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पानसेरिया ने पहले बताया था कि विभाग प्रभावित इलाकों पर कड़ी नजर रख रहा है। मरीजों की यात्रा और केस हिस्ट्री की जांच के साथ-साथ वेक्टर-कंट्रोल के उपायों को भी मजबूत किया जा रहा है। महामारी की शुरुआत में ही स्वास्थ्य विभाग ने डॉक्टरों को निर्देश दिए थे कि बच्चों के संदिग्ध मामलों को बिना देरी किए ऑक्सीजन और वेंटिलेटर की सुविधा वाले अस्पतालों में रेफर करें।
इनपुट: IANS



